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हाईकोर्ट ने रेरा कार्यालय को धर्मशाला शिफ्ट करने के सरकार के फैसले पर लगाई रोक

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राज्य सरकार की अधिसूचना को जनहित याचिका में दी गई चुनौती, कर्मचारियों और बच्चों की पढ़ाई पर असर का हवाला

शिमला

सरकार को हाईकोर्ट का नोटिस, अगली सुनवाई 13 अगस्त को
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने रेरा कार्यालय को शिमला से धर्मशाला शिफ्ट करने संबंधी अधिसूचना पर रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावलिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने सरकार से जवाब मांगा है। अधिसूचना को जनहित याचिका के जरिए चुनौती दी गई थी, जिसमें तर्क दिया गया कि रेरा से जुड़ी अधिकतर गतिविधियां शिमला, सोलन, बद्दी और बरोटीवाला क्षेत्रों में होती हैं।

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34 कर्मचारियों की स्थिति का भी दिया गया हवाला
याचिका में कहा गया है कि रेरा कार्यालय में 34 कर्मचारी तैनात हैं, जिनमें से अधिकांश आउटसोर्स व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। यदि कार्यालय धर्मशाला शिफ्ट होता है, तो उन्हें कम वेतन में स्थानांतरित होकर काम करना कठिन होगा, साथ ही उनके बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित होगी।

मुख्य सचिव के कार्यकाल को लेकर भी याचिका, सुनवाई एक साथ
उसी खंडपीठ ने मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना के कार्यकाल को चुनौती देने वाली याचिका पर भी सुनवाई की। दोनों याचिकाओं पर अगली सुनवाई 13 अगस्त को होगी।

ड्रग मामलों में शिमला पहले नंबर पर, नशा विरोधी प्रयास तेज
हाईकोर्ट में दायर एक हलफनामे में पुलिस महानिदेशक ने बताया कि हिमाचल में एनडीपीएस मामलों की संख्या में पिछले पांच वर्षों से वृद्धि हो रही है। वर्ष 2023 में कुल 2147 केस दर्ज किए गए, जिनमें सबसे अधिक शिमला, मंडी और कुल्लू जिलों से थे। हाल ही में शुरू किए गए “ड्रग फ्री हिमाचल” एप और टोल-फ्री हेल्पलाइन 1908 के ज़रिए तस्करों की पहचान और गिरफ्तारी में मदद मिल रही है।

डिजिटाइजेशन से तेजी आई मामलों के निपटारे में
हाईकोर्ट ने दिसंबर 2024 से जुलाई 2025 के बीच 37,083 में से 35,940 मामलों का निपटारा किया। पांच साल से अधिक पुराने 929 मामलों को भी प्राथमिकता दी गई। हाईकोर्ट के पांच न्यायाधीशों की कमी के बावजूद यह निपटान हुआ। लाइव स्ट्रीमिंग, ई-फाइलिंग और डिजिटल रिकॉर्डिंग के जरिए न्याय प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया गया है।

न्यायिक सुधारों की ओर बढ़ते कदम
हाईकोर्ट की ओर से मिशन मोड पर विशेष पीठों का गठन कर पुराने और संवेदनशील मामलों को तेजी से निपटाया जा रहा है। इसमें यौन अपराध, वरिष्ठ नागरिक, महिलाओं और किशोरों से जुड़े मामले शामिल हैं। जिला न्यायालयों की स्थिति सुधारने के लिए उच्च न्यायालय की निगरानी में मल्टी-लेयर कमेटी कार्य कर रही है।

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