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स्टडी लीव पर शिक्षकों के वेतन में कटौती, अब मिलेगा सिर्फ 40% वेतन

By हिमांचलनाउ डेस्क नाहन Published: 12 Dec 2024, 12:35 PM | Updated: 12 Dec 2024, 12:35 PM 1 min read

Himachalnow / शिमला

हिमाचल प्रदेश में स्टडी लीव पर नई व्यवस्था लागू

नए दिशा-निर्देशों के तहत उन्हें केवल 40% वेतन दिए जाने का प्रावधान किया गया है। शिक्षा विभाग ने सीसीएस (अवकाश) नियमों में बदलाव करते हुए यह स्पष्ट किया है कि 24 महीने तक के अध्ययन अवकाश के लिए अब वित्त विभाग की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा, जो पहले प्रशासनिक विभाग द्वारा दी जाती थी। यह बदलाव वित्तीय संतुलन बनाए रखने और प्रशासनिक प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए लागू किया गया है।

नए नियमों के तहत, अध्ययन अवकाश के दौरान महंगाई भत्ता और मकान किराया भी दिया जाएगा। हालांकि, वेतन का भुगतान केवल तब किया जाएगा, जब कर्मचारी यह प्रमाणपत्र प्रस्तुत करेगा कि वह किसी अंशकालिक रोजगार, छात्रवृत्ति या वजीफे से किसी भी प्रकार की आय प्राप्त नहीं कर रहा है। अध्ययन अवकाश के दौरान कर्मचारियों को पूर्ण वेतन दिए जाने की परंपरा से सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ता रहा है, जिसे कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने मंगलवार को सभी कॉलेज प्रिंसिपलों को इस संदर्भ में पत्र जारी किया। प्रदेश सरकार ने हाल ही में केंद्रीय सिविल सेवाएं (अवकाश) नियम-1972 में संशोधन कर इसे हिमाचल प्रदेश नियम-2024 के रूप में लागू किया है। इससे पहले, वर्ष 1986 से प्रशासनिक विभाग 24 महीने तक की स्टडी लीव को मंजूरी देता आया था, लेकिन अब यह अधिकार वित्त विभाग को स्थानांतरित कर दिया गया है।

सरकार का मानना है कि अध्ययन अवकाश पर अधिक संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों के रहने से विभागीय कामकाज प्रभावित होता है। इसके साथ ही सरकारी कोष पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ता है। नए नियमों के तहत, देश या विदेश में अध्ययन अवकाश के दौरान 40 फीसदी वेतन के साथ महंगाई भत्ता और मकान किराया दिया जाएगा। हालांकि, इसे सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारी को प्रमाणित करना होगा कि वह किसी अन्य वित्तीय स्रोत से लाभ नहीं ले रहा है।

यह स्पष्ट किया गया है कि संशोधित नियम केवल उन कर्मचारियों पर लागू होंगे, जो 7 अगस्त 2024 या उसके बाद अध्ययन अवकाश पर गए हैं। जो कर्मचारी इस तिथि से पहले अध्ययन अवकाश पर गए थे, उन्हें पिछले नियमों के तहत वेतन और लाभ मिलते रहेंगे। इस बदलाव के पीछे मुख्य उद्देश्य वित्तीय जिम्मेदारी और प्रशासनिक सुधार को सुनिश्चित करना है, ताकि सरकारी संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन हो सके।

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