सिरमौर
किसानों की बढ़ी चिंता
हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में मक्के की फसल पर ‘सांप की केंचुली’ जैसे भूरे और पीले धब्बों वाला रोग तेजी से फैल रहा है। इस बीमारी की पहचान कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं की डॉ. शिवानी धीमान ने ‘बैंडेड लीफ एंड शीथ ब्लाइट’ के रूप में की है।
फसल पर असर
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह रोग फफूंद (फंगस) से होता है, जो पत्तियों और तनों पर भूरे-सफेद लहरदार धब्बे बनाता है। अगर समय रहते इसका उपचार न हो, तो यह रोग पूरी फसल को नष्ट कर सकता है।
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क्या है समाधान
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी कि बीज बोने से पहले उन्हें फफूंदनाशक से उपचारित करें। वहीं, फसल में लक्षण दिखने पर प्रोपिकोनाज़ोल (Propiconazole), अज़ोक्सिस्ट्रोबिन (Azoxystrobin) या अज़ोक्सिस्ट्रोबिन + डिफेनकोनाज़ोल (Azoxystrobin + Difenconazole) का प्रति लीटर पानी में 1 ग्राम की दर से छिड़काव करें।
नियमित निरीक्षण जरूरी
विशेषज्ञों ने कहा कि किसान अपनी फसल का नियमित निरीक्षण करें और शुरुआती लक्षण दिखते ही उपचार शुरू करें। साथ ही स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से समय पर सलाह लेना भी जरूरी है।
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