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बल्क ड्रग पार्क को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों पर ऊना प्रशासन सख्त , मीडिया वॉकथ्रू में दिए पारदर्शिता के सबूत

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बल्क ड्रग पार्क : हरोली के पोलियां में उपायुक्त जतिन लाल ने मीडिया को दिखाई परियोजना की सच्चाई, बताया – रोजगार और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ऐतिहासिक कदम

ऊना/वीरेंद्र बन्याल

सोशल मीडिया अफवाहों को लेकर किया बड़ा खुलासा

ऊना जिला के हरोली में निर्माणाधीन बल्क ड्रग पार्क को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रांतियों और अफवाहों के बीच जिला प्रशासन ने स्पष्टता और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम उठाया। उपायुक्त जतिन लाल की अध्यक्षता में मंगलवार को पोलियां स्थित निर्माण स्थल पर मीडिया वॉकथ्रू का आयोजन किया गया, जहां परियोजना से जुड़े सभी पर्यावरणीय, सामाजिक और तकनीकी तथ्यों की जानकारी दी गई।

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वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सख्त पर्यावरणीय नियमों के पालन का भरोसा
उपायुक्त ने बताया कि बल्क ड्रग पार्क परियोजना का कार्य राष्ट्रीय हरित अधिकरण, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्र व राज्य सरकार की पर्यावरणीय गाइडलाइनों के अनुरूप पूरी पारदर्शिता से किया जा रहा है। भू-जल संरक्षण, वनीकरण, प्रदूषण नियंत्रण और वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है। परियोजना का 33% क्षेत्र ग्रीन बेल्ट के रूप में संरक्षित रहेगा और प्रत्येक कटे पेड़ के बदले 10 नए पौधे लगाए जाएंगे।

हिमाचल को बनाएगा फार्मा हब, खुलेगा निवेश और रोजगार का बड़ा द्वार
इस परियोजना को राज्य के औद्योगिक विकास का मेरुदंड बताते हुए उपायुक्त ने कहा कि यह मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की दूरदर्शी सोच का परिणाम है। 1405 एकड़ में 2000 करोड़ की लागत से बन रहे इस पार्क से भविष्य में 10,000 करोड़ निवेश और 10,000 से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। साथ ही भारत को API (एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट) के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।

जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के ठोस इंतजाम
भूजल संरक्षण की दिशा में प्रशासन ने 15 MLD क्षमता वाला जल भंडारण टैंक पहले ही तैयार कर लिया है और भविष्य के लिए 170 करोड़ रुपये की जलापूर्ति योजना बनाई गई है, जिसके तहत भाखड़ा डैम से पानी लाया जाएगा। DFO सुशील राणा ने बताया कि पोलियां में 45,000 से ज्यादा पेड़ हैं, जिनमें अधिकांश निम्न श्रेणी के हैं और किसी भी प्रकार की वन भूमि प्रभावित नहीं हो रही।

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