ना बीजेपी ना कांग्रेस, दामाद के लिए हाथ जोड़कर मांगूंगा वोट- बलवीर
HNN/नाहन
विनोद सुल्तानपुरी के मैदान में उतरते ही कांग्रेस ने जीत के लिए मजबूत किलेबंदी करनी भी शुरू कर दी है। पच्छाद के गिन्नी घाट से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष जी आर मुसाफिर अटैक मोड में विनोद सुल्तानपुरी और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर को साथ लेकर प्रचार में डट गए हैं। तो वहीं श्री रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के पूर्व प्रत्याशी रहे सुल्तानपुरी के ससुर बलबीर चौहान अपने समर्थकों सहित बिरादरी को साधने में जुट गए हैं।
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बता दें कि बलवीर चौहान श्री रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र से 2017 तक कैंडिडेट रहे हैं। 2022 के चुनाव में बलवीर चौहान को भाजपा ने टिकट न देकर नारायण सिंह को मैदान में उतारा था। नारायण सिंह मौजूदा विधानसभा उपाध्यक्ष विधायक श्री रेणुका जी विनय कुमार से 860 मतों से हार गए थे। तो वहीं बलवीर चौहान पर भाजपा हाई कमान ने अनुशासनहीनता का आरोप लगाकर उन्हें निष्कासित कर दिया था।

यहां यह भी बताना जरूरी है कि यह विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस का मजबूत दुर्ग रहा है। विनय कुमार को 28642 जबकि भाजपा के नारायण सिंह को 27782 वोट डाले थे। जाहिर है विनोद सुल्तानपुरी को अपने ससुर 2017 में प्रत्याशी रहे बलवीर चौहान का भी साथ मिल रहा है और विधायक विनय कुमार का भी। हालांकि बलवीर चौहान का कहना है कि वह ना तो कांग्रेस की ओर से और ना ही भाजपा की ओर से, बल्कि एक ससुर होने के नाते अपने दामाद के लिए वोट मांगेंगे।
बलवीर चौहान ने दावा करते हुए कहा कि क्षेत्र में करीब 500 परिवारों का उनका कुनबा है। वही नाहन विधानसभा क्षेत्र में अपार कैंट थापा परिवार से विनोद सुल्तानपुरी के पिता केडी सुल्तानपुरी का धर्मचारा रहा है। इस परिवार का गोरखा बिरादरी में अच्छा खासा होल्ड भी है। नाहन विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी सुरेश कश्यप की ससुराल है, तो वहीं कांग्रेस के विधायक अजय सोलंकी के सामने जीत की चुनौती है।
विनोद सुल्तानपुरी की सबसे अच्छी स्थिति पच्छाद विधानसभा क्षेत्र में ज्यादा नजर आती है। इसकी बड़ी वजह गंगूराम मुसाफिर की घर वापसी मानी जा रही है। मंगलवार को सुबह से ही विनोद सुल्तानपुरी सहित शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर व भारी संख्या में अपने समर्थकों के साथ मुसाफिर डोर टू डोर प्रचार पर निकले हुए हैं। बड़ी बात तो यह है कि दयाल प्यारी और मुसाफिर अब इकट्ठा हो चुके हैं।
बता दें कि मुसाफिर की बगावत के चलते ही दयाल प्यारी को हार का मुंह देखना पड़ा था। रीना कश्यप को 21215, दयाल प्यारी को 17385, जबकि बतौर आजाद उम्मीदवार मुसाफिर को 13187 वोट डले थे। बड़ी बात तो यह थी कि 2022 के चुनाव में राष्ट्रीय देव भूमि पार्टी के सुशील भृगु भी 8113 वोट लेने में कामयाब हुए थे। जिसका सबसे बड़ा नुकसान यहां कांग्रेस को ही हुआ था।
ऐसे में यदि मुसाफिर किंग ना बने किंग मेकर रहते तो दयाल प्यारी को करीब 30000 से भी अधिक वोट डलते। सिरमौर में यदि बात की जाए तो पांवटा विधानसभा क्षेत्र में सुखराम चौधरी जो कि भाजपा के विधायक हैं उनकी और शिलाई में बलदेव तोमर के अच्छे वोट बैंक के चलते सुरेश कश्यप की स्थिति यहां मजबूत नजर आती है। यहां इसलिए कहना भी जरूरी है कि शिलाई विधानसभा क्षेत्र में कुल 76343 मतदाता है।
इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के हर्षवर्धन को 32093 जबकि भाजपा के बलदेव तोमर को 31711 यानी केवल 382 मतों से हर्षवर्धन जीत पाए थे। जनजातीय मुद्दे पर यहां कांग्रेस बैक फुट पर है तो वहीं पावटा साहिब में सुखराम चौधरी की लोकप्रियता और उनका करीब एक महीने से भी अधिक समय से भाजपा प्रत्याशी के लिए डोर टू डोर प्रचार काफी असरदार नजर आ रहा है। भाजपा के प्रचार की यदि बात की जाए तो प्रदेश अध्यक्ष जिला से ताल्लुक रखने के बावजूद प्रचार प्रसार में एक बड़ी रणनीति की कमी नजर आ रही है।
कुल मिलाकर कहा जाए तो जिला सिरमौर जो की सुरेश कश्यप का गृह क्षेत्र भी है, बावजूद इसके विनोद सुल्तानपुरी के मैदान में उतरने के बाद उनकी राहें काफी मुश्किल हो गई है। बलवीर चौहान का कहना है कि यहां मोदी लहर केवल भाजपा के कार्यकर्ताओं तक ही सीमित है अन्य मुद्दों पर यदि देखा जाए तो भाजपा यहां बैक फुट पर है।
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