11 लाख सैलानी, 160 होमस्टे और सिरमौर का क्यूज़ीन: पर्यटन की उभरी नई पहचान
हिमाचल नाऊ न्यूज नाहन
जिला सिरमौर में पर्यटन अब केवल पहाड़ और मंदिरों तक सीमित नहीं रहा। वर्ष 2025 के अंत तक जिले में करीब 11 लाख पर्यटकों की आमद दर्ज की गई है, जो अपने आप में एक बड़ा संकेत है कि सिरमौर अब प्रदेश के उभरते पर्यटन जिलों में मजबूती से अपनी जगह बना रहा है।
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मौसम में आए बदलाव, डिजिटल मीडिया पर सिरमौर के पारंपरिक हिमाचली व्यंजनों की बढ़ती मौजूदगी और प्राकृतिक वातावरण में ठहरने की चाह ने यहां के होमस्टे टूरिज्म को नई उड़ान दी है।

वर्तमान में जिला सिरमौर में लगभग 160 होमस्टे पंजीकृत हैं, जिनमें 150 पुराने और 10 नए पंजीकरण शामिल हैं।
राज्य सरकार और पर्यटन विभाग की ओर से भी होमस्टे को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा भी होमस्टे के ऑनलाइन पंजीकरण पर विशेष जोर दिया गया है।

हिमाचल प्रदेश होमस्टे नियम–2025 के तहत जिले की सभी होमस्टे इकाइयों को अधिसूचना जारी होने के तीन माह के भीतर जिला पर्यटन विकास अधिकारी के पास पंजीकरण करवाना अनिवार्य किया गया है। उल्लेखनीय यह है कि यह पंजीकरण पूरी तरह निशुल्क रखा गया है।
सिरमौर की खास पहचान अब उसके क्यूज़ीन टूरिज्म से भी बन रही है। हरिपुरधार स्थित मानव हिल रिजॉर्ट, बढ़ियालटा इसका बड़ा उदाहरण है, जहां प्राकृतिक वातावरण के बीच पारंपरिक होमस्टे व्यवस्था, स्थानीय उत्पादों से बना ट्रेडिशनल फूड और महिलाओं के समूहों द्वारा तैयार किया गया ‘शी-हाट’ स्वाद पर्यटकों को खासा आकर्षित कर रहा है।

जिले के प्रमुख होटल और रिसॉर्ट्स भी पर्यटन को मजबूत आधार दे रहे हैं। ग्रैंड व्यू रिजॉर्ट, जमटा, सलानी रिसोर्ट सेन वाला नहान होटल जय क्लार्क, होटल ब्लैक मैंगो, काला अंब और सरांहा स्थित होटल यूनिवर्स बेहतर सेवाओं, सुविधाजनक लोकेशन और आरामदायक ठहराव के चलते पर्यटकों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।

धार्मिक पर्यटन सिरमौर की रीढ़ बना हुआ है। श्री रेणुका जी, बाला सुंदरी मंदिर त्रिलोकपुर, भुर्शिंग महादेव पच्छाद, शृंग ऋषि की गुफाएं बागथन,

चूड़धार स्थित चूड़ेश्वर महादेव, हरिपुरधार मां भगांइनी मंदिर, नाहन की मां काली मंदिर, पांवटा साहिब का ऐतिहासिक गुरुद्वारा, पातालेश्वर महादेव, पौड़ी वाला शिव मंदिर और आदि बद्री स्थित मां सरस्वती का उद्गम स्थल जिले को धार्मिक नक्शे पर विशेष पहचान दिलाते हैं।

पर्यटन विभाग अब भविष्य की दिशा भी तय कर रहा है। एडवेंचर टूरिज्म के साथ-साथ ट्रैकिंग, नेचर वॉक, फॉरेस्ट स्टे और ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं पर भी मंथन किया जा रहा है।
इसके अलावा केंद्र सरकार के हालिया बजट में सामने आए हेल्थ टूरिज्म के विज़न को सिरमौर में लागू करने की संभावना भी तलाशी जा रही है।
प्राकृतिक वातावरण में नेचर ट्रीटमेंट और वेलनेस यूनिट स्थापित कर न केवल पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

जिला पर्यटन विकास अधिकारी पदमा नेगी ने बताया कि आने वाले समय में होमस्टे और होटल संचालकों के सहयोग से फूड फेस्टिवल आयोजित किए जाएंगे, जिसमें प्राकृतिक खेती से उत्पादित सब्जियां, फल और पारंपरिक व्यंजनों के जरिए सिरमौर की फूड कल्चर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
कुल मिलाकर, 11 लाख पर्यटकों की आमद यह साफ संकेत है कि सिरमौर अब केवल एक शांत पहाड़ी जिला नहीं, बल्कि परंपरा, प्रकृति, स्वाद और संभावनाओं का समृद्ध पर्यटन केंद्र बनकर उभर रहा है।
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