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सिरमौर की ‘सुपर मॉम और बेटे’ ने गोल्ड मेडल जीत देश में लहराया परचम

Shailesh Saini | 2 फ़रवरी 2026 at 9:52 pm

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नाहन :

कहते हैं कि प्रतिभा विरासत में मिलती है और नाहन के एक परिवार ने इस बात को सच कर दिखाया है। खेल जगत में हिमाचल प्रदेश के एक मां और बेटे की जोड़ी चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

जिस वक्त बेटा उत्तराखंड के देहरादून में मार्शल आर्ट के दांव-पेंचों से प्रतिद्वंद्वियों को पस्त कर गोल्ड मेडल जीता। ठीक उसी समय मां पुणे में नेशनल मास्टर्स गेम्स में प्रदेश का परचम लहरा रही थीं।

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बात हो रही हैअंतरराष्ट्रीय एथलीट सीमा परमार और उनके 17 वर्षीय बेटे समरवीर सिंह रोहिला की, जिन्होंने अपनी उपलब्धियों से न केवल सिरमौर, बल्कि पूरे हिमाचल का नाम रोशन किया है।

देहरादून में आयोजित तीसरी ऑल इंडिया पेंचक सिलट मार्शल आर्ट प्रतियोगिता में समरवीर सिंह रोहिला ने जूनियर वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। इस नेशनल इवेंट में 1200 से अधिक खिलाड़ियों के बीच समरवीर की यह जीत बेहद खास रही।

हिमाचल की टीम ने पेंचक सिलट प्रतियोगिता में कुल 10 पदक जीते, जिसमें सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इनमें से 8 पदक अकेले सिरमौर जिले के खिलाड़ियों ने झटके।

पेंचक सिलट प्रतियोगिता में सिरमौर जिले के समरवीर सिंह रोहिला ने जूनियर वर्ग में गोल्ड, मंडी जिले की किरत कमल कौर ने सब जूनियर वर्ग में सिल्वर, सिरमौर की सहना ने जूनियर वर्ग में ने सिल्वर, सिरमौर की बियनका तनेजा मकन वर्ग में (7 से 9 वर्ष आयु वर्ग) में सिल्वर, जबकि नविका शर्मा ने प्री टीन वर्ग में सिल्वर मेडल जीते।

इसके अलावा मंडी के अर्श वैद्य ने प्री टीन वर्ग में सिल्वर, सिरमौर की तृषि वर्मा ने प्री टीन वर्ग में ब्रॉन्ज, सिरमौर की देवांशी पाठे ने प्री टीन वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल व सिरमौर के मनन चौहान ने मकन वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीते।वहीं दूसरी ओर पुणे में आयोजित 8वीं नेशनल मास्टर्स गेम्स में उनकी मां सीमा परमार ने 50 प्लस आयु वर्ग में अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया।

सीमा परमार ने हैमर थ्रो में स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा बैडमिंटन, डिस्कस थ्रो व वॉलीबॉल जैसी स्पर्धाओं में भी अपना जलवा दिखाते हुए पदक हिमाचल के खाते में डाले।

इसमें एक स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य पदक शामिल है।दिलचस्प बात है कि खेल जगत में हिमाचल से मां-बेटे की यह अपनी तरह की पहली उपलब्धि हो सकती है, जब एक ही समय में देश के अलग-अलग कोनों में मां-बेटे ने न केवल देवभूमि का नाम गौरवांवित किया, बल्कि सही मायनों में सिरमौर के अर्थ को चरितार्थ किया है।

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