नाहन कोर्ट ने प्रतिवादी को हस्तक्षेप से रोका, स्थायी निषेधाज्ञा मंजूर
हिमाचल नाऊ न्यूज नाहन
ददाहू क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद में नाहन की सीनियर सिविल जज उपासना शर्मा की अदालत ने स्पष्ट और अहम फैसला सुनाते हुए वादी के कब्जे को कानूनी संरक्षण प्रदान किया है।
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अदालत ने प्रतिवादी को विवादित भूमि में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से रोकते हुए स्थायी निषेधाज्ञा जारी की है।अदालत के समक्ष वादी रमेश कुमार ने याचिका दायर कर बताया था कि वह मौजा चुली ददाहू, तहसील ददाहू स्थित खाता-खतौनी नंबर 387/537, खसरा नंबर 480/395/16 व 974/869, कुल रकबा 00-02-04 बीघा भूमि का मालिक व कब्जाधारी है।
म्यूटेशन दर्ज होने के बाद पुराने जर्जर मकान को गिराकर नए निर्माण की तैयारी की जा रही थी।वादी के अनुसार, भूमि से सटी जमीन के मालिक प्रतिवादी योगिंदर दत्त ने 12 अक्टूबर 2021 और 20 अक्टूबर 2021 को बिना किसी अधिकार के भूमि में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया और रिटेनिंग वॉल बनाने की मंशा जताई,
जिससे वादी को बेदखली का खतरा उत्पन्न हो गया।अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद जमाबंदी का अवलोकन करते हुए कहा कि वादी का नाम विधिवत दर्ज है और स्वामित्व व कब्जा प्रमाणित होता है।
प्रतिवादी द्वारा वादी के अधिकारों को चुनौती देने के बावजूद कोई ठोस दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया।कोर्ट ने माना कि वादी ने भूमि में हस्तक्षेप और हस्तक्षेप की मंशा को सफलतापूर्वक सिद्ध किया है, जिसके चलते वह स्थायी निषेधाज्ञा पाने का अधिकारी है।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भूमि पर किसी निर्माण या अतिक्रमण का प्रत्यक्ष प्रमाण रिकॉर्ड पर नहीं है, इसलिए अनिवार्य निषेधाज्ञा का दावा स्वीकार नहीं किया गया।
अदालत ने अपने आदेश में प्रतिवादी को निर्देश दिए कि वह भविष्य में विवादित भूमि में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप न करे। मामले में किसी भी पक्ष पर लागत नहीं डाली गई। फैसला 16 जनवरी 2026 को खुले न्यायालय में सुनाया गया।
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