सत्र न्यायालय नाहन ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया
हिमाचल नाऊ न्यूज नाहन
चेक बाउंस के एक मामले में नाहन के सत्र न्यायालय ने आरोपी द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा को पूरी तरह सही ठहराया।
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यह मामला राजगढ़ स्थित साईं को-ऑपरेटिव नॉन एग्रीकल्चर थ्रिफ्ट एंड क्रेडिट सोसायटी से जुड़ा है। अदालत के अनुसार आरोपी ने सोसायटी से ऋण लिया था, जिसकी अदायगी न होने पर खाता एनपीए घोषित किया गया।
रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी ने जुलाई 2022 में ₹75,650 का चेक सोसायटी के पक्ष में जारी किया। चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर “Account Closed” टिप्पणी के साथ अनादरित हो गया।
इसके बाद सोसायटी द्वारा विधिसम्मत कानूनी नोटिस भेजा गया, लेकिन आरोपी ने तय अवधि में भुगतान नहीं किया। इस पर राजगढ़ की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अदालत ने आरोपी को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया था।
अदालत ने छह माह के साधारण कारावास और ₹75 हजार मुआवजे की सजा सुनाई थी।निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए आरोपी ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की।
आरोपी की ओर से दलील दी गई कि चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था और देनदारी सिद्ध नहीं की गई।हालांकि सत्र न्यायालय ने दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने कहा कि आरोपी ने न तो चेक पर हस्ताक्षर से इनकार किया और न ही कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत कर वैधानिक धारणा को खंडित किया।अदालत ने स्पष्ट किया कि “Account Closed” की स्थिति में चेक बाउंस भी धारा 138 के अंतर्गत आता है।
केवल मौखिक बयान या सफाई से आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती।अदालत ने पाया कि निचली अदालत का फैसला कानून और साक्ष्यों के अनुरूप है। ऐसे में आरोपी की अपील खारिज करते हुए सजा को बरकरार रखा गया।
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