विकसित भारत का दृष्टिकोण आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय मूल्यों के संतुलन पर आधारित होना चाहिए। राज्यपाल ने नीति निर्माण में अर्थशास्त्रियों की भूमिका को अत्यंत महत्त्वपूर्ण बताया।
शिमला
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को किया संबोधित
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने भारतीय अर्थशास्त्र संघ के 108वें वार्षिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि यह सम्मेलन नीति संवाद और राष्ट्र निर्माण के लिए एक सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि ऐसे मंचों पर होने वाली चर्चाएं देश की नीतियों को दिशा देने में अहम भूमिका निभाती हैं।
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विकसित भारत 2047 की व्यापक परिकल्पना
राज्यपाल ने सम्मेलन की थीम ‘इंडियाज पर्स्पेक्टिव: विकसित भारत 2047’ का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है। इसमें समावेशी विकास, सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण, तकनीकी आत्मनिर्भरता और मानवीय मूल्यों का संवर्धन भी समान रूप से शामिल है।
डिजिटल अवसंरचना और नवाचार में भारत की अग्रणी भूमिका
उन्होंने कहा कि भारत आज आर्थिक मजबूती के साथ-साथ डिजिटल अवसंरचना, नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति और बुनियादी ढांचे के विस्तार में भी अग्रणी बनकर उभर रहा है। विकसित भारत 2047 का दृष्टिकोण आंकड़ों से आगे बढ़कर हर नागरिक के लिए सम्मान, अवसर और संतुलित विकास सुनिश्चित करने की सोच पर आधारित है।
अर्थशास्त्रियों से समाजोन्मुख नीति निर्माण का आह्वान
राज्यपाल ने अर्थशास्त्रियों से आह्वान किया कि वे अपने विचारों और शोध का उपयोग समाज की वास्तविक आवश्यकताओं को पूरा करने वाली नीतियों के निर्माण में करें, ताकि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
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