हिमाचली लोक संगीत की दुनिया में एक नई आवाज़ जुड़ी है, जहां अर्चना ठाकुर का पहला पहाड़ी गीत रिलीज हुआ है। संगीत प्रेमियों से गीत को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और इसे संस्कृति से जुड़ा सराहनीय प्रयास माना जा रहा है।
ऊना/जोल/वीरेंद्र बन्याल
पहाड़ी संगीत को मिली नई स्वर पहचान
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जोल क्षेत्र से संबंध रखने वाली उभरती गायिका अर्चना ठाकुर ने अपने पहले पहाड़ी गीत के साथ संगीत जगत में कदम रखा है। उनके इस प्रयास को स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बचपन से रहा गायन का शौक
अर्चना ठाकुर को प्रारंभ से ही गायन में रुचि रही है। उन्होंने अपनी संगीत यात्रा की शुरुआत धार्मिक मंचों और जागरण कार्यक्रमों से की, जहां उन्होंने लगातार अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं का स्नेह प्राप्त किया।
भजन और लोक संगीत से जुड़ा सफर
इससे पहले भी उनका एक भजन रिलीज हो चुका है, जिसे श्रद्धालुओं ने पसंद किया था। अब पहाड़ी गीत के माध्यम से उन्होंने लोक संस्कृति को नए अंदाज़ में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।
संगीतमय दंपति की सांस्कृतिक भूमिका
अर्चना ठाकुर का विवाह प्रसिद्ध गायक लवली ठाकुर से हुआ है, जो जागरण और लोक प्रस्तुतियों के लिए जाने जाते हैं। दोनों कलाकार मिलकर भजन, जागरण और लोक संगीत के जरिए हिमाचली संस्कृति को सहेजने का कार्य कर रहे हैं।
नई पीढ़ी तक पहुंच रही लोक धरोहर
पहाड़ी गीत के माध्यम से अर्चना ठाकुर ने न केवल अपनी प्रतिभा दिखाई है बल्कि लोक संगीत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल भी की है। संगीत प्रेमियों को उम्मीद है कि आने वाले समय में वे और भी गीतों के साथ श्रोताओं से जुड़ी रहेंगी।
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