41 साल की देश की सेवा, बोले… अंतिम सांस भी भारत मां के लिए गिरवी
HNN/नाहन
करीब 41 वर्ष भारतीय सीमा की रक्षा में गुजारने वाले हितेंद्र सिंह सेवानिवृत हो गए हैं। आईटीबीपी से सेवानिवृत्ति के बाद नाहन डाबों मोहल्ला पहुंचे सीमा रक्षक का भव्य स्वागत हुआ। माना जाता है कि जब हितेंद्र सिंह चीन सीमा पर हड्डियों को जमा देने वाली बर्फ पर अपनी राइफल के साथ कदमताल करते थे तो चीनी दुश्मन आंख उठा कर भी बॉर्डर से इस बार देखने की हिम्मत नहीं करते थे।
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5 मई 1983 को आईटीबीपी में भर्ती हुए हितेंद्र सिंह ने ट्रेनिंग के बाद अपनी पहली सेवाएं हिमाचल प्रदेश किन्नौर जिला के साथ लगती भारत-चीन सीमा पर दी। उसके बाद उत्तराखंड के जोशीमठ फिर श्रीनगर, लेह लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश में पोस्टिंग के दौरान देश की सीमा की रक्षा में 40 से अधिक साल गुजार दिए।
बता दें कि यह सीमा सुरक्षा का वह पहले दस्ता होता है जिसके सीने से गुजर कर दुश्मन की गोली बॉर्डर क्रॉस करती है। बेखौफ होकर भारत माता की रक्षा में न जाने कितने हजारों कदम बॉर्डर की रक्षा में नापे होंगे। घर पहुंचे हितेंद्र सिंह की पत्नी कुसुम लता ने अपने पति की आरती उतार कर उनका स्वागत किया। तो वहीं उनकी बेटी शिवानी, बेटे आशीष सहित परिवार व शहर के लोगों ने फूल माला पहना कर उन्हें सेल्यूट किया।
हितेंद्र सिंह ने बताया कि वह भले ही नौकरी से सेवानिवृत हो गए हो मगर उनके सीने से निकलने वाली हर सांस से अंतिम सांस तक भारत मां के प्रति समर्पण के लिए तत्पर है। हितेंद्र ने बताया कि बॉर्डर पर ड्यूटी निभाना बहुत कठिन होता है, मगर जब सवाल भारत मां की रक्षा का हो तो सीमा पर बढ़े हुए कांटे भी फूल बन जाते हैं।
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