HNN/ शिमला
प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने जहां इन्वेस्टर्स के लिए सिंगल विंडो को खत्म कर उद्योग स्थापित करने को लेकर अधिकारियों की टाइमबॉन्ड जिम्मेवारी सुनिश्चित की है तो वही डिस्टलरी उद्योग को प्रदेश में बढ़ावा देने के लिए फ्रेंडी माहौल देने का वायदा भी किया है। असल में प्रदेश में स्थापित करीब 19 बॉटलिंग प्लांट अधिकतर शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाली ईएनए बाहरी राज्यों से लेते हैं। जिसके चलते सरकार को एक हेल्दी राजस्व नहीं मिल पा रहा था। यही नहीं प्रदेश में डिस्टलरी प्लांट लगाने को लेकर इन्वेस्ट अभी कोई खास रूचि नहीं दिखा पा रहे थे।
यहां बताना जरूरी है कि प्रदेश में करीब 19 बॉटलिंग प्लांट है जिनमें अधिकतर जिला सिरमौर में लगे हुए हैं। इन बॉटलिंग प्लांट में जो ईएनए बाहरी राज्यों से लाई जाती है उस पर 9 रूपए प्रति प्रूफ्रीडर इंपोर्ट फीस लगती है। जबकि यदि यह बॉटलिंग प्लांट हिमाचल की डिस्टलरी से ईएनए लेते हैं तो उन्हें 9 रूपए प्रति प्रूफ लीटर इंपोर्ट फीस नहीं देनी होगी। बॉटलिंग उद्योग से जुड़े उद्योग पतियों का कहना है कि प्रदेश में पीएपीएल कांगड़ा की डिस्टलरी उनकी आपूर्ति पूरी नहीं कर पाती है। यही नहीं दूसरी डिस्टलरी भी पर्याप्त नहीं पढ़ पा रही है।
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जिसको लेकर उन्हें मजबूरन बाहर से इंपोर्ट फीस देकर अल्कोहल लेना पड़ता है। गौरतलब हो कि प्रदेश में चार डिस्टलरीज है जिनमें से दो फंक्शनिंग में है जबकि नालागढ़ तथा ऊना में दो नए डिस्टलरी उद्योग लगभग बनकर तैयार होने वाले हैं। अब यदि इस वर्ष के अंत तक यह दोनों डिस्टलरी फंक्शनिंग में आ जाती है तो सरकार को 50 से 60 करोड़ रुपए तक का राजस्व भी मिलना शुरू हो जाएगा। हालांकि प्रदेश में बॉटलिंग प्लांट पर्याप्त है मगर इन बॉटलिंग प्लांट की आपूर्ति को लेकर पर्याप्त डिस्टलरीज नहीं है। ऐसे में सरकार ने डिस्टलरी उद्योग को प्रदेश में आकर्षित करने के लिए अपने दरवाजे भी खोल दिए हैं।
बड़ी बात तो यह है कि यदि कोई इन्वेस्टर प्रदेश में डिस्टलरी लगाना चाहता है तो सरकार की ओर से उद्योग को स्थापित करने में जो एनओसी लेनी पड़ती है वह सारी जिम्मेवारी एक टाइमबॉन्ड के साथ सरकार बना कर देगी। यानी उद्योगपति को केवल उद्योग के लिए अप्लाई करना है बाकी तमाम कागजी कार्रवाई सरकार द्वारा स्थापित किए जाने वाला लीगल डिपार्टमेंट निश्चित समय पर करेगा। बता दें कि आई एन ए ना केवल शराब उद्योग बल्कि दवा उद्योग में भी इस्तेमाल होता है।
दोनों एल्कोहल अलग-अलग तरीके के होते हैं एक एल्कोहल खाने योग्य और दूसरा खाने योग्य नहीं होता। प्रदेश में दोनों तरह के अल्कोहल की अच्छी खासी डिमांड भी है। उधर, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि यदि कोई प्रदेश में डिस्टलरी उद्योग में इन्वेस्टमेंट करना चाहता है तो उसको सरकार की ओर से हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
वही राज्य कर एवं आबकारी विभाग के आयुक्त यूनुस खान ने कहा कि प्रदेश में चार डिस्टलरी है जिनमें से एक फिलहाल बंद है जबकि पीएपीएल फंक्शनिंग में है। उन्होंने कहा इस वर्ष के अंत तक दो नई डिस्टलरीज नालागढ़ और ऊना में फंक्शनिंग में आ जाएंगी। उन्होंने पुष्टि करते हुए बताया कि प्रदेश की डिस्टलरी से जो ईएनए लिया जाता है उस पर इंपोर्ट फीस नहीं है जबकि बाहर से लाई जाने वाली ईएनए पर 9 रूपए प्रति 5 लीटर इंपोर्ट फीस देनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कुल 19 बॉटलिंग प्लांट, चार डिस्टलरी तथा दो ब्रूवरी हैं।
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