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लाल बहादुर शास्त्री / प्रधानमंत्री जो जनता के दिल में बसे, जिनकी मृत्यु आज भी रहस्य है। आज उनकी पुण्यतिथि पर पढ़ें उनसे जुड़े किस्से

By हिमाचलनाउ डेस्क Published: 11 Jan 2025, 9:11 AM | Updated: 11 Jan 2025, 9:11 AM 1 min read

भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री अपने सरल स्वभाव, निष्ठा और मजबूत इच्छाशक्ति के लिए जाने जाते हैं। उनका कार्यकाल भले ही मात्र 18 महीने का रहा हो, लेकिन उन्होंने अपने नेतृत्व में देश को कई प्रेरणादायक सीख दीं। उनकी पुण्यतिथि (11 जनवरी) पर उनके जीवन से जुड़े रोचक किस्से और ऐतिहासिक घटनाओं पर एक नजर डालते हैं।


युद्ध के दौरान पूरे देश ने रखा उपवास

लाल बहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्री रहते, 1965 में भारत को पाकिस्तान के साथ युद्ध का सामना करना पड़ा। इस दौरान भारत में अनाज की भारी कमी थी, और देश को अमेरिका से आयात पर निर्भर रहना पड़ता था।

  • शास्त्री जी ने पूरे देशवासियों से सप्ताह में एक समय का भोजन छोड़ने की अपील की।
  • उनकी इस अपील का इतना प्रभाव पड़ा कि लोगों ने इसे खुले दिल से अपनाया।
  • इस अनुकरणीय प्रयास ने ना केवल भारतीय सेना के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने में मदद की, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरणा भी दी।

ताशकंद समझौता: निराशा और रहस्यमयी मौत

1965 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना ने कई रणनीतिक क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था। लेकिन युद्ध समाप्ति के लिए सोवियत संघ के मध्यस्थता में उज़्बेकिस्तान के ताशकंद में भारत-पाक वार्ता आयोजित की गई।

  • ताशकंद समझौते में तय हुआ कि भारत अपने कब्जे वाले इलाके पाकिस्तान को वापस करेगा।
  • शास्त्री जी इस समझौते से संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने अपनी बेटी से कहा था, “जो समझौता परिवार को पसंद नहीं, वह अन्य लोगों को कैसे पसंद आएगा।”
  • 10 जनवरी 1966 को समझौते पर हस्ताक्षर के ठीक एक दिन बाद, उनकी रहस्यमयी मृत्यु हो गई। यह घटना आज भी कई सवाल खड़े करती है।

ईमानदारी की मिसाल: अपने बेटे का प्रमोशन रोका

शास्त्री जी ईमानदारी और नैतिकता के प्रतीक थे।

  • प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने पाया कि उनके बेटे को अनुचित तरीके से प्रमोशन दिया गया है।
  • उन्होंने तुरंत इस फैसले को पलट दिया और संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई।
  • यह घटना उनकी सादगी और पारदर्शिता को दर्शाती है।

वीआईपी संस्कृति का विरोध

शास्त्री जी ने अपने जीवन में हमेशा सादगी को महत्व दिया।

  • एक बार, गृहमंत्री रहते हुए, वह कोलकाता की यात्रा पर थे। ट्रैफिक में फंसे होने के कारण फ्लाइट छूटने का डर था।
  • पुलिस ने उन्हें ट्रैफिक में प्राथमिकता देने का सुझाव दिया, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया।
  • उनका कहना था कि इससे आम जनता को परेशानी होगी, और उन्होंने सादगीपूर्ण तरीके से अपने फैसले का पालन किया।

जय जवान, जय किसान: एक प्रेरणादायक नारा

शास्त्री जी का दिया गया “जय जवान, जय किसान” का नारा देश को आत्मनिर्भरता और आशा की प्रेरणा देता है।

  • यह नारा 1965 के युद्ध और खाद्यान्न संकट के दौरान दिया गया था।
  • इसने किसानों और सैनिकों के महत्व को रेखांकित किया और देश को एकजुट किया।

आजादी की लड़ाई में सक्रिय योगदान

लाल बहादुर शास्त्री ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • वह नमक सत्याग्रह, भारत छोड़ो आंदोलन, और अन्य स्वतंत्रता आंदोलनों में सक्रिय रहे।
  • स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्हें 9 बार जेल जाना पड़ा।

प्रेरणादायक विरासत

लाल बहादुर शास्त्री का जीवन सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता का अद्वितीय उदाहरण है।

  • उनकी सोच ने देश को आत्मनिर्भरता और नैतिकता का रास्ता दिखाया।
  • उनकी पुण्यतिथि पर हमें उनकी शिक्षाओं और मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए।

शास्त्री जी का जीवन हमें सिखाता है कि सादगी में भी शक्ति होती है और दृढ़ निश्चय से बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।