सिरमौर के हाटी समुदाय के 57 साल पुराने संघर्ष की ऐतिहासिक जीत, पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बतौर सिरमौर के मामा ने दिया था भरोसा
सिरमौर/नई दिल्ली:
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले का गिरी पार क्षेत्र आज एक नई सुबह का साक्षी बना है। करीब 57 वर्षों से अपनी पहचान और अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हाटी समुदाय के लिए वह सपना अब हकीकत में बदल गया है, जिसे उनके पूर्वजों ने देखा था।
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केंद्र सरकार और संसद की मुहर के बाद अब हाटी समुदाय को आधिकारिक तौर पर ‘अनुसूचित जनजाति’ (ST) का दर्जा मिल चुका है। यह न केवल एक कानूनी जीत है, बल्कि इस दुर्गम क्षेत्र के तीन लाख लोगों के स्वाभिमान की पुनर्स्थापना है।
संसद में गूंजी हाटियों की आवाज
इस ऐतिहासिक बदलाव की नींव तब और मजबूत हुई जब केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संसद में इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखा। मंत्री मेघवाल ने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार हाटी समुदाय की भौगोलिक और सांस्कृतिक विशिष्टता का सम्मान करती है।
उन्होंने कहा कि कानूनों में आवश्यक सुधार और संशोधन इसलिए किए जा रहे हैं ताकि दशकों से लंबित पड़े इस तरह के न्यायसंगत अधिकारों को बिना किसी देरी के जनता तक पहुंचाया जा सके। उनके इस रुख ने साफ कर दिया कि दिल्ली की सरकार गिरी पार के अंतिम व्यक्ति के साथ खड़ी है।
क्या है इस जीत के मायने?
गिरी पार की 154 पंचायतों के लिए यह दर्जा एक जादुई चाबी की तरह है। अब तक जो क्षेत्र विकास की दौड़ में पिछड़ रहा था, वह अब सीधे केंद्र की जनजातीय कल्याण योजनाओं से जुड़ जाएगा।
अब इस क्षेत्र के युवाओं को सेना, अर्धसैनिक बलों और केंद्रीय नौकरियों में एसटी कोटे का लाभ मिलेगा। साथ ही, शिक्षा के क्षेत्र में नीट, जेईई और यूपीएससी जैसी परीक्षाओं में भी यहां के बच्चों को विशेष आरक्षण मिलेगा, जिससे उनके लिए बड़े शहरों के प्रतिष्ठित संस्थानों के रास्ते खुलेंगे।
कानूनी बाधाओं पर सरकार का कड़ा रुख
हालांकि इस प्रक्रिया में कई तकनीकी और कानूनी अड़चनें आईं, लेकिन सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे वे टिक न सकीं। अदालत में चल रहे मामलों के बीच सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि हाटी समुदाय के अधिकारों के साथ कोई समझौता न हो।
प्रशासन ने अब एसटी प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पर काम तेज कर दिया है, जिससे पात्र लोगों को जल्द से जल्द सरकारी लाभ मिलना शुरू हो सके।
जश्न में डूबीं शिलाई और संगड़ाह की वादियां
जैसे ही यह स्पष्ट हुआ कि अब अधिकारों का रास्ता साफ है, समूचा गिरी पार क्षेत्र जश्न के सागर में डूब गया। शिलाई, संगड़ाह, राजगढ़ और पांवटा साहिब के बाजारों में ढोल-नगाड़ों के साथ पारंपरिक नाटी की धूम रही।
हाटी विकास मंच के कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह उन माताओं और बुजुर्गों के संघर्ष का फल है जिन्होंने बर्फबारी और तपती धूप की परवाह किए बिना इस आंदोलन को जीवित रखा।
विकास का एक नया युग
जनजातीय दर्जा मिलने के बाद अब गिरी पार क्षेत्र के लिए केंद्र सरकार से विशेष बजट का प्रावधान होगा। सड़कों का जाल बिछाने, बेहतर अस्पताल बनाने और आधुनिक स्कूल खोलने के लिए अब फंड की कमी नहीं रहेगी। यह फैसला आने वाले समय में सिरमौर की तस्वीर बदलने वाला साबित होगा। हाटी समुदाय के लोगों का मानना है कि अब वे वास्तव में मुख्यधारा का हिस्सा बन गए हैं।
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