सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने का स्वागत, शिक्षकों के लिए अतिरिक्त परीक्षा अव्यावहारिक
नाहन
सरकारी विद्यालयों को सीबीएसई से संबद्ध करने के सरकार के हालिया फैसले का स्वागत करते हुए स्कूल प्रवक्ता संघ ने यह भी स्पष्ट किया है कि शिक्षकों के लिए अलग कैडर बनाने और नई परीक्षा आयोजित करने का प्रस्ताव पूरी तरह अव्यावहारिक है।
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें: Join WhatsApp Group
यह निर्णय संघ की आम सभा में मंगलवार को डाइट नाहन में आयोजित बैठक में लिया गया।संघ ने कहा कि वर्तमान में कार्यरत नियमित शिक्षक पहले ही कर्मचारी चयन आयोग और लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयनित होकर सेवा में आए हैं।
ऐसे में सीबीएसई विद्यालयों के लिए विशेष परीक्षा करवाने का कोई औचित्य नहीं बनता। संघ ने यह भी तर्क दिया कि शिक्षा विभाग जहां सैकड़ों शिक्षकों की आउटसोर्स भर्ती कर रहा है और अस्थायी शिक्षकों की सेवाएं जारी रखने का प्रावधान बना रहा है,
वहीं 15 से 25 वर्षों के अनुभव वाले शिक्षकों को विशेष परीक्षा से गुजरना न्यायसंगत नहीं है।संघ ने बताया कि विभागीय शिक्षक समय-समय पर जिला, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।
ऐसे में उनके लिए पुनः परीक्षा करवाना शिक्षा विभाग की योजना को अव्यवहारिक बनाता है। संघ ने यह भी कहा कि यदि कोई शिक्षक स्वयं सीबीएसई स्कूल में कार्य नहीं करना चाहता, तो विकल्प के तौर पर अन्य शिक्षकों से सहमति ली जा सकती है,
लेकिन नई परीक्षा या अलग कैडर बनाना अनुचित है।संघ के प्रतिनिधियों में हिमाचल प्रदेश विद्यालय प्रवक्ता संघ के राज्य चेयरमैन सुरेंद्र पुंडीर, राज्य विशिष्ट सदस्य नरेंद्र नेगी,
जिला अध्यक्ष डॉ. आईडी राही, राज्य संरक्षक रमेश नेगी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय शर्मा, महिला विंग सिरमौर अध्यक्ष संध्या चौहान, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा, महासचिव दिनेश शर्मा और कोषाध्यक्ष लाल सिंह ठाकुर शामिल थे।
बैठक में संघ ने मांग की कि सीबीएसई और हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध सभी विद्यालयों में उप प्रधानाचार्य के पद सृजित किए जाएं और उन्हें संयुक्त वरिष्ठता के आधार पर भरा जाए।
संघ ने यह भी कहा कि स्थानांतरण नीति में किसी बदलाव की जरूरत नहीं है और सभी शिक्षकों को सीबीएसई में पढ़ाने का अवसर मिलना चाहिए।
संघ ने प्रस्ताव रखा कि सीबीएसई विद्यालयों में शिक्षक की अधिकतम सेवाकाल दस वर्ष और न्यूनतम तीन वर्ष रखा जाए, ताकि दूरदराज के क्षेत्रों के शिक्षक भी इस अवसर का लाभ ले सकें।
साथ ही संघ ने आउटसोर्स भर्ती का विरोध किया और चेतावनी दी कि इससे शिक्षकों में असमानता और विभाजन पैदा होगा।
संघ ने लंबित वेतनमान और महंगाई भत्ते की किश्त जारी करने की भी मांग उठाई। अंत में संघ ने शिक्षा निदेशक, स्कूल शिक्षा हिमाचल प्रदेश को स्कूल शिक्षा उप निदेशक गुणवत्ता एवं उच्च के माध्यम से ज्ञापन सौंपा।
📢 लेटेस्ट न्यूज़
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें
ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए अभी हमारे WhatsApp ग्रुप का हिस्सा बनें!
Join WhatsApp Group





