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पांवटा साहिब: तेज रफ्तार कार चालक को डेढ़ वर्ष कारावास और ₹5500 जुर्माना

Shailesh Saini | 28 जुलाई 2025 at 10:22 pm

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2014 के सड़क हादसे में एक राहगीर की मौत का दोषी पाया गया चालक

हिमाचल नाऊ न्यूज़ पांवटा साहिब:

जिला सिरमौर के पांवटा साहिब में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी न्यायालय दो के न्यायाधीश विशाल तिवारी की अदालत ने तेज रफ्तार कार से राहगीरों को टक्कर मारने के दोषी आत्माराम को डेढ़ वर्ष के कारावास और ₹5500 जुर्माने की सजा सुनाई है।

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यह फैसला सड़क सुरक्षा के प्रति लापरवाही बरतने वाले चालकों के लिए एक सख्त संदेश है।सहायक जिला न्यायवादी दीक्षित शर्मा ने बताया कि अदालत ने दोषी आत्माराम पुत्र सुमेर चाँद, निवासी वीपोओ शिवा, तहसील पांवटा साहिब को विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई।

भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 279 और 337 के तहत उन्हें छह-छह महीने की कैद और ₹1000 व ₹500 का जुर्माना लगाया गया। इसके अतिरिक्त, धारा 338 के तहत एक साल की कैद और ₹1000 का जुर्माना, तथा धारा 304ए के तहत डेढ़ वर्ष की कैद और ₹3000 का जुर्माना भी लगाया गया।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जुर्माना अदा न करने पर दोषी को छह महीने का अतिरिक्त कारावास काटना होगा।यह मामला 2 मार्च 2014 का है, जब पांवटा साहिब पुलिस थाना क्षेत्राधिकार में एक सड़क हादसे की सूचना मिली थी।

पीएसआई मुकुल शर्मा और एचसी राम कुमार ने मौके पर पहुँचकर लाल चंद पुत्र रघुनंदन लाल, निवासी वीपीओ चूड़ीवाला, तहसील साहा, जिला अम्बाला, हरियाणा के बयान दर्ज किए।

लाल चंद ने पुलिस को बताया कि उस दिन वह अपनी बहन के घर दुर्गा कॉलोनी, पांवटा साहिब में सुबह करीब 10 बजे पहुंचे थे। वे अपने दोस्त पवन कुमार, जो प्रॉपर्टी का काम करते हैं, और नीरज कुमार व पवन शर्मा के साथ बाता मंडी में एक प्लांट देखने के लिए निकले थे।

करीब 11 बजे, वे बातामंडी पहुंचकर अपनी गाड़ी साइड में खड़ी करके पैदल बहराल की तरफ प्लांट देखने जा रहे थे। तभी बाता पुल की तरफ से तेज रफ्तार से आ रही एक आई20 ग्रे/स्लेटी रंग की कार (नंबर HP17C-4335) ने अचानक नीरज कुमार, पवन कुमार और पवन शर्मा को टक्कर मार दी।

लाल चंद ने तुरंत अपनी निजी गाड़ी (नंबर HR29N-0076) में घायल तीनों लोगों को सिविल हॉस्पिटल पांवटा साहिब पहुंचाया। दुर्भाग्यवश, वहाँ डॉक्टरों ने नीरज शर्मा को मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने इस मामले में आत्माराम के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया और जांच के बाद अदालत में चालान पेश किया। कोर्ट में 13 गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद आत्माराम को दोषी पाया गया, जिसके बाद अदालत ने उन्हें यह सजा सुनाई।

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