जगाधरी और पौंटा साहिब के बीच प्रस्तावित नई रेल लाइन को लेकर संसद में स्थिति स्पष्ट कर दी गई है। वहीं, पीएम स्वनिधि योजना के तहत स्ट्रीट वेंडर्स को डिजिटल भुगतान पर करोड़ों रुपये का लाभ मिलने की जानकारी भी दी गई।
दिल्ली
कम ट्रैफिक के कारण नई रेल लाइन को मंजूरी नहीं
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केन्द्रीय रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में सांसद इंदु बाला गोस्वामी के प्रश्न के उत्तर में बताया कि जगाधरी और पौंटा साहिब के बीच प्रस्तावित नई रेल लाइन के लिए सर्वे पूरा किया जा चुका है, लेकिन कम ट्रैफिक के आकलन के कारण इस परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया गया है। उन्होंने बताया कि लगभग 62 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन के निर्माण को फिलहाल मंजूरी नहीं दी गई है।
रेल परियोजनाएं ट्रैफिक और उपयोगिता के आधार पर होती हैं तय
रेलवे मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी नई रेल परियोजना को ट्रैफिक की संभावनाओं, मार्ग की लाभप्रदता, कंजेस्टेड लाइनों पर दबाव और रेलवे की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर ही स्वीकृति दी जाती है। इन मानकों पर विचार करने के बाद ही जगाधरी–पौंटा साहिब रेल लाइन को आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
पीएम स्वनिधि योजना से स्ट्रीट वेंडर्स को करोड़ों का कैशबैक
इसी क्रम में केन्द्रीय आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री तोखन साहू ने राज्यसभा में जानकारी दी कि पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत जून 2020 से अब तक स्ट्रीट वेंडर्स को डिजिटल माध्यम से ऋण चुकाने पर कुल 242 करोड़ रुपये का कैशबैक प्रदान किया गया है।
1.27 करोड़ आवेदन, लाखों को मिला ऋण लाभ
उन्होंने बताया कि योजना के तहत अब तक 1.27 करोड़ से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स से ऋण के लिए आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 68.89 लाख स्ट्रीट वेंडर्स को ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जिनके तहत कुल 99.07 लाख रुपये की राशि वितरित की गई है।
समय पर ऋण चुकाने पर ब्याज में सब्सिडी
मंत्री ने बताया कि पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत समय सीमा के भीतर ऋण चुकाने वाले स्ट्रीट वेंडर्स को ब्याज पर सात प्रतिशत की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। यह ब्याज सब्सिडी सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा की जाती है।
डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोत्साहन
उन्होंने यह भी बताया कि डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से योजना के तहत डिजिटल माध्यम से ऋण अदायगी करने वाले स्ट्रीट वेंडर्स को प्रति वर्ष अधिकतम 1200 रुपये का प्रोत्साहन दिया जाता है। इससे स्ट्रीट वेंडर्स को डिजिटल भुगतान अपनाने, अपनी क्रेडिट हिस्ट्री मजबूत करने और भविष्य में बड़े ऋण प्राप्त करने में सहायता मिल रही है, जिससे वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिल रहा है।
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