सिरमौर से आनंद परमार की दोबारा ताजपोशी, 2027 की सियासी बिसात बिछी
शिमला /नाहन
आल इंडिया कांग्रेस कमेटी ने हिमाचल प्रदेश में संगठन को चुनावी मोड में लाते हुए प्रदेश के 11 जिलों के जिला कांग्रेस अध्यक्षों की घोषणा कर दी है। इस फैसले को सीधे तौर पर 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।
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खास बात यह रही कि जिला सिरमौर से आनंद परमार को लगातार दूसरी बार जिला अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस नेतृत्व ने साफ संदेश दे दिया है कि पार्टी अब प्रयोग नहीं, बल्कि मजबूत और अनुभवी नेतृत्व के भरोसे मैदान में उतरेगी।
प्रदेश में कांग्रेस की सरकार और भाजपा के विपक्ष में होने के बीच यह संगठनात्मक फैसला राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। कांग्रेस ने इस सूची के जरिए न केवल संगठनात्मक संतुलन साधा है, बल्कि यह भी जता दिया है कि आने वाले समय में जिला स्तर पर ही भाजपा को घेरने की रणनीति पर काम किया जाएगा।
सिरमौर जिले में आनंद परमार की दोबारा ताजपोशी को राजनीतिक हलकों में बड़ा संकेत माना जा रहा है। हिमाचल निर्माता के पौत्र आनंद परमार को रिपीट करके पार्टी ने स्पष्ट किया है कि सीमावर्ती और राजनीतिक रूप से संवेदनशील जिले सिरमौर में नेतृत्व को लेकर कोई अस्थिरता नहीं चाहती। यह फैसला संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ क्षेत्रीय भरोसे को भी मजबूत करता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इस बार जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में कांग्रेस ने केवल जातिगत गणित तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि काबिलियत, संगठनात्मक पकड़ और चुनावी मैनेजमेंट को प्राथमिकता दी है। यही वजह है कि कई जिलों में अनुभवी चेहरों को दोबारा जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को जमीन तक पहुंचाया जा सके।
घोषित सूची के अनुसार मंडी से चंपा ठाकुर, कांगड़ा से अनुराग शर्मा, हमीरपुर से सुमन भारती शर्मा, लाहौल-स्पीति से डोरजे अंगरूप, कुल्लू से सेस राम आज़ाद, चंबा से सुरजीत कुमार भरमौरी, सिरमौर से आनंद परमार, सोलन से सुभाष चंद वर्माणी, शिमला अर्बन से इंदरजीत सिंह, बिलासपुर से अंजना धीमान और ऊना से देशराज गौतम को जिला कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया है।
कांग्रेस का यह कदम भाजपा के लिए भी साफ राजनीतिक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। संगठन के मोर्चे पर आक्रामक होकर कांग्रेस यह संकेत देना चाहती है कि 2027 के चुनाव से पहले पार्टी सरकार और संगठन—दोनों स्तरों पर पूरी तरह तैयार है।
कुल मिलाकर, 11 जिला अध्यक्षों की यह घोषणा कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें जमीनी संगठन को धार देकर भाजपा को राजनीतिक तौर पर घेरने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
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