Himachalnow / बद्दी
हिमाचल प्रदेश की 17 वर्षीय रानी राजपूत ने अपनी शक्ति और साहस से प्रदेश को गर्व महसूस कराया है। हाल ही में आयोजित राज्य स्तरीय क्लासिक बेंच प्रेस और डेड लिफ्ट प्रतियोगिता में रानी ने 90 किलो वजन उठाकर “स्ट्रांग वुमन” का खिताब जीता। यह जीत न केवल उनकी शारीरिक शक्ति का प्रतीक है, बल्कि उनके हौसले और मेहनत की भी मिसाल है।
रानी राजपूत: एक युवा ताकत की पहचान
रानी राजपूत, जो बद्दी के वर्धमान क्षेत्र की निवासी हैं, ने अपनी मेहनत और समर्पण से यह उपलब्धि हासिल की। 17 साल की उम्र में 90 किलो वजन उठाना कोई छोटी बात नहीं है, और रानी ने यह साबित कर दिया कि महिला सशक्तिकरण और शारीरिक ताकत में कोई भेदभाव नहीं होता। इस अद्वितीय उपलब्धि के कारण उन्हें हिमाचल की स्ट्रांग वुमन के खिताब से नवाजा गया।
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अन्य प्रतियोगियों की भी शानदार उपलब्धियां
रानी के साथ ही अन्य प्रतियोगियों ने भी इस राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में अपनी शारीरिक ताकत का लोहा मनवाया:
- 18 वर्षीय आदित्य गिरी ने 105 किलो वजन उठाकर बेंच प्रेस में गोल्ड मेडल जीता।
- 23 वर्षीय रूपेश ने 90 किलो वजन उठाया, जबकि 25 वर्षीय मनोज ने 120 किलो और 51 वर्षीय मुकेश ने 100 किलो वजन उठाकर गोल्ड मेडल जीते।
यह प्रतियोगिता कांगड़ा के पालमपुर तहसील के भवारना में आयोजित की गई थी, जहां शाहपुर के विधायक केवल सिंह पठानिया ने विजेताओं को सम्मानित किया।
राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चयन
इस प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करने वाले सभी प्रतिभागी अब राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने के योग्य हो गए हैं। यह युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है, जहां वे अपनी शक्ति और कौशल को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित कर सकते हैं।
नितिन ठाकुर का दोहरा गोल्ड मेडल जीतना
मधाला के नितिन ठाकुर ने भी प्रतियोगिता में एक बेहतरीन प्रदर्शन किया। नितिन ने 74 किलो भार वर्ग में 130 किलो बेंच प्रेस और 212.5 किलो डेड लिफ्ट करते हुए दो गोल्ड मेडल जीते। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उन्हें, बल्कि उनके क्षेत्र को भी गौरवान्वित किया। नितिन का चयन 2025 में होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए हुआ है।
निष्कर्ष
हिमाचल प्रदेश में युवाओं की शारीरिक ताकत और सामर्थ्य का प्रदर्शन जारी है। रानी राजपूत और नितिन ठाकुर जैसी प्रतिभाओं के प्रदर्शन से यह साबित होता है कि मेहनत, समर्पण और संघर्ष से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। इन युवा एथलीटों ने हमें यह सिखाया कि अगर इच्छा शक्ति मजबूत हो तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।
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