बीते वर्ष होलसेल गोदामों से गायब हुई थी पेटियां, जांच जारी है
HNN/ नाहन
हिमाचल प्रदेश में शराब माफिया कितना बेखौफ है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि होलसेल गोदाम से ही शराब की पेटियां गायब हो गई थी। बीते वर्ष कांगड़ा और ऊना के होलसेल गोदामों से 10,000 शराब की पेटियां बिना लाइसेंस फीस के उठा ली गई थी।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार ऐसा नहीं है कि एक्साइज विभाग के द्वारा बोतलों को गोदाम से उठाने के लिए परमिशन नहीं दी गई थी। परमिशन दी गई थी मगर शातिर ठेकेदारों के द्वारा पास में छेड़छाड़ करते हुए परमिशन में संख्या बढ़ा दी जाती थी। उदाहरण के तौर पर 50 पेटी की गोदाम से उठाने की परमिशन दी गई जिसके बाद परमिशन लेटर में 50 पेटी को टेंपरिंग करते हुए 500 से ज्यादा बना दिया जाता था।
एक्साइज विभाग के द्वारा इस पर कार्यवाही भी की गई, यही नहीं जुर्माना भी लगाया गया था। हालांकि इस मामले में अभी भी जांच पूरी नहीं हुई है बावजूद इसके आबकारी एवं कराधान विभाग पर लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं। इस तरह का मामला कांगड़ा, ऊना के साथ शिमला में भी हुआ था। हालांकि गोदाम से फ्रॉड कर उठाई गई शराब को नकली नहीं कहा जा सकता मगर कहीं ना कहीं आबकारी एवं कराधान विभाग की लापरवाही तो नजर आती ही है।
हालांकि विभाग के द्वारा सरकारी राजस्व को नुक्सान नहीं होने दिया। विभाग के द्वारा कथित 10000 पेटी पर टैक्स व जुर्माना भी वसूल लिया गया था। बावजूद इसके बड़ा सवाल यह है कि मामले में दोषी कौन था। यहां यह भी बता दें कि हर डिस्टलरी में आबकारी एवं कराधान विभाग की ओर से इंस्पेक्टर बैठते हैं। उन्हीं की देखरेख में शराब तैयार करने के लिए स्प्रिट रिलीज की जाती है। प्लांट बंद होने के बाद इंस्पेक्टर घर को चले जाते हैं।
यहां सवाल यह भी उठता है कि इंस्पेक्टर के जाने के बाद कहीं प्लांट को अवैध रूप से तो नहीं चलाया जाता होगा। यह कहा नहीं जा सकता। जबकि होना यह चाहिए कि इंस्पेक्टर के 5:00 बजे के बाद जाते ही फैक्ट्री का मुख्य गेट और प्लांट की मुख्य मशीन को अगले दिन के लिए सील किया जाना चाहिए, मगर ऐसा होता नहीं।
इन मामलों में सिरमौर राज्य कर एव आबकारी विभाग के सहायक आयुक्त की नजर से ऐसा ही मामला बच नहीं पाया था। सहायक आयुक्त ने सिरमौर में ज्वाइन करने के तुरंत बाद ही नकली होलोग्राम का मामला पकड़ा था। अधिकारी के द्वारा पांवटा साहिब की फैक्ट्री से 13000 लीटर इ एन ए बरामद किया था। तो वही 18 जनवरी 2022 को मंडी के एक बॉटलिंग प्लांट से भी करीब 1200 लीटर स्प्रिट पकड़ा गया था।
ऐसा नहीं है कि आबकारी एवं कराधान विभाग कार्यवाही नहीं करता है करता है मगर कहीं ना कहीं स्टाफ की भारी कमी और उसके साथ एक्साइज पुलिस की कमी भी नजर आती है। शराब माफिया इन्हीं सभी कमियों का फायदा उठाकर सरकार के राजस्व को मोटा चूना लगाते हैं और इन्हीं की आड़ में नकली शराब बनाने वाले संरक्षण प्राप्त माफिया भी पनपने लग जाते हैं।
जहरीली शराब कांड को लेकर स्थानीय लोगों ने बड़े गंभीर आरोप भी लगाए थे। मृतक के एक भतीजे ने बताया कि उनके द्वारा बार-बार पुलिस को सूचना दी जाती थी बावजूद इसके अवैध शराब का धंधा बदस्तूर जारी रहा।
यही नहीं हरियाणा और पंजाब से भी शराब सस्ती होने के कारण भारी मात्रा में स्मगलिंग भी की जाती है। स्मगलिंग की गई शराब असली है या नकली यह भी बड़ा सवाल है। सूत्रों की माने तो ना केवल मंडी बिलासपुर बल्कि सिरमौर में भी होम डिलीवरी सिस्टम रहता है। शादी अथवा बड़ी पार्टियों में अधिकतर शराब संबंधित क्षेत्र से ना आकर हरियाणा से अवैध रूप से लाई जाती है। यही नहीं शराब बगैर एक्साइज की परमिशन के घरों तक डिलीवरी भी दी जाती है।
इसका सबसे बड़ा खामियाजा ना केवल सरकार के राजस्व को भुगतना पड़ता है बल्कि करोड़ों रुपए के शराब के ठेके लेने वाले ठेकेदार भी बुरी तरह से प्रभावित होते हैं। बरहाल जहरीली शराब कांड के बाद सरकार एक्शन मोड में आ चुकी है। संभवत सरकार जल्द ही एक्साइज पुलिस के लिए भी कोई बड़ी घोषणा कर सकती है।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जिस तरीके से मात्र कुछ घंटों में ही इस जघन्य कांड का खुलासा करवाया है वह तारीफ के काबिल है। मगर सवाल फिर भी यह उठता रहेगा कि लंबे अरसे से किए जा रहे इस नकली शराब के धंधे पर स्थानीय पुलिस शिकायतें मिलने के बावजूद क्यों चुप रही।
आबकारी एवं कराधान विभाग के आयुक्त यूनुस खान का कहना है कि विभाग बॉटलिंग प्लांट की जांच बराबर कर रहा है। उन्होंने बताया कि अभी तक जो भी मामले उनके पास आए हैं उनमें कड़ी कार्रवाई की गई है। मंडी प्रकरण में पूरी जानकारी के बाद कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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