कफोटा बाजार के समीप जल शक्ति विभाग की सड़क तोड़े जाने और जल शक्ति विभाग व नेशनल हाईवे की भूमि पर एंक्रोचमेंट के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। जॉइंट डिमार्केशन के दौरान जहां मोर्थ के ठेकेदार द्वारा जल शक्ति विभाग की सड़क तोड़े जाने की पुष्टि हुई, वहीं रेवेन्यू विभाग की निशानदेही प्रक्रिया ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
कफोटा
निशानदेही प्रक्रिया पर उठे सवाल
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निशानदेही के दौरान मौके पर मौजूद लोग उस समय हैरान रह गए जब रेवेन्यू विभाग के कानूनगो और पटवारी ने तोड़ी गई सड़क की बजाय नई बनाई गई पकडंडी को नाप कर प्रस्तुत किया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए भू-माफिया को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया।
जॉइंट डिमार्केशन में मोर्थ अधिकारी भी रहे मौजूद
बताया जा रहा है कि इस जॉइंट डिमार्केशन में मोर्थ के रेवेन्यू अधिकारी भी मौजूद थे। इसके बावजूद कंपनी द्वारा तोड़ी गई जल शक्ति विभाग की सड़क का बचा हुआ हिस्सा आज भी मौके पर मौजूद है, जिसे स्थानीय लोग सबसे बड़ा भौतिक सबूत बता रहे हैं।
एंक्रोचमेंट बचाने के आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि जल शक्ति विभाग और मोर्थ की भूमि पर कब्जा कर बनाई गई दुकानों को बचाने के लिए पूरी निशानदेही को योजनाबद्ध तरीके से मोड़ा गया। आरोप है कि भू-माफिया ने स्थानीय प्रशासन की कथित अनदेखी का लाभ उठाकर बड़े स्तर पर एंक्रोचमेंट की है।
मामले को उच्च न्यायालय में ले जाने की तैयारी
जल शक्ति विभाग और स्थानीय लोगों ने इस निशानदेही को सिरे से खारिज कर दिया है। मामले को लेकर अब इसे उच्च न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी की जा रही है। स्थानीय लोगों ने पूरे प्रकरण में बड़े भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
विभाग ने जताई असंतुष्टि
उधर जल शक्ति विभाग के एसडीओ विवेक शर्मा ने कहा कि विभाग इस निशानदेही से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जल शक्ति विभाग की सड़क को बिना अनुमति के तोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि विभाग इस संबंध में मोर्थ और संबंधित कंपनी के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करवाएगा।
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