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सीडीएससीओ ड्रग अलर्ट में हिमाचल की 51 दवाएं फेल, फार्मा उद्योग पर फिर उठे सवाल

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केंद्रीय जांच में हिमाचल प्रदेश के दवा उद्योगों में निर्मित बड़ी संख्या में दवाएं गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतर पाई हैं। इस खुलासे के बाद मरीजों की सुरक्षा और दवाओं की गुणवत्ता को लेकर चिंता गहरा गई है।

बीबीएन

दिसंबर ड्रग अलर्ट में सामने आया बड़ा खुलासा

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देश में दवाओं की गुणवत्ता पर निगरानी रखने वाली शीर्ष नियामक संस्था केंद्रीय औषधि नियंत्रक मानक संगठन की दिसंबर माह की ड्रग अलर्ट रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है कि देशभर में जांच की गई 167 दवाएं तय मानकों पर खरी नहीं उतरीं। इनमें हिमाचल प्रदेश में निर्मित कुल 51 दवाएं गुणवत्ता मानकों में फेल पाई गई हैं।

कई बीमारियों से जुड़ी दवाएं जांच में फेल

गुणवत्ता में खामियां हाई ब्लड प्रेशर, हृदय व कोलेस्ट्रॉल, एलर्जी, अस्थमा, एंटीबायोटिक, दर्द, बुखार, एसिडिटी, न्यूरोलॉजी, कृमि रोग, कैल्शियम की कमी और बच्चों की खांसी-जुकाम से जुड़ी दवाओं में पाई गई हैं। टैबलेट, सिरप, नेजल स्प्रे, ड्रॉप्स, क्रीम और इंजेक्शन जैसी आम उपयोग की दवाओं में कमियां दर्ज की गई हैं।

राज्य और केंद्रीय प्रयोगशालाओं में फेल हुए सैंपल

रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं में 74 और राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं में 93 दवा नमूनों को नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी घोषित किया गया। हिमाचल से संबंधित मामलों में 31 दवाएं राज्य ड्रग लैब्स में और 20 दवाएं सीडीएससीओ की सेंट्रल व रीजनल लैब्स में फेल पाई गई हैं।

इन औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ा है मामला

जांच में फेल पाई गई दवाएं बद्दी, नालागढ़, बरोटीवाला, सोलन, संसारपुर टैरेस, कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाणू और ऊना स्थित दवा उद्योगों में निर्मित बताई गई हैं। इससे प्रदेश के फार्मा उद्योग की गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं।

सात दवाएं नकली भी पाई गईं

ड्रग अलर्ट में सात दवा नमूनों को स्प्यूरियस यानी नकली घोषित किया गया है। ये दवाएं अनधिकृत निर्माताओं द्वारा अन्य कंपनियों के ब्रांड नामों का दुरुपयोग कर तैयार की गई थीं। मामलों में जांच जारी है और नियमों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

सिरप और इंजेक्शन में गंभीर खामियां

हिमाचल में निर्मित छह कफ व कोल्ड सिरप सहित अन्य तरल दवाओं में कंटेंट, पीएच और तकनीकी मानकों से जुड़ी गड़बड़ियां पाई गई हैं। कुछ इंजेक्शनों में पार्टिकुलेट मैटर, क्लैरिटी और डिस्क्रिप्शन से संबंधित खामियां सामने आई हैं, जिन्हें मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना जा रहा है।

दवा कंपनियों को जारी हुए नोटिस

राज्य दवा नियंत्रक मनीष कपूर ने बताया कि जिन दवाओं के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं, उनसे संबंधित दवा कंपनियों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। फेल पाए गए बैचों को बाजार से तत्काल रिकॉल करने के निर्देश दिए गए हैं और विस्तृत जांच जारी है।

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