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संसद में टूटा सिरमौर का ‘रेल’ सपना: कम ट्रैफिक का बहाना बना केंद्र ने जगाधरी-पाउंटा लाइन को लटकाया

Shailesh Saini | 18 दिसंबर 2025 at 8:44 am

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लोगों ने कहा धन्यवाद इंदु गोस्वामी कम से कम मुद्दा तो उठाया

​ नई दिल्ली/ नाहन:
सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण और औद्योगिक हब के रूप में विख्यात जिला सिरमौर को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने का दशकों पुराना सपना एक बार फिर धराशायी हो गया है।

राज्यसभा सांसद इंदु बाला गोस्वामी द्वारा पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि जगाधरी और पाउंटा साहिब के बीच 62 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन का सर्वे तो पूरा हो गया है, लेकिन कम ट्रैफिक की संभावना के चलते फिलहाल इस परियोजना का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया है।

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रेल मंत्रालय का यह तर्क कि इस रूट पर ट्रैफिक कम है, क्षेत्र के लोगों और विशेषज्ञों के गले से नीचे नहीं उतर रहा है।
​गौरतलब है कि 1960 के दशक से इस रेल लाइन की मांग की जा रही है।

जिला सिरमौर में न केवल कालाअम्ब और पाउंटा साहिब जैसे प्रदेश के दो प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र हैं, बल्कि पाउंटा साहिब में डीआरडीओ (DRDO) और जिला में सेना का स्पेशल फोर्सेस ट्रेनिंग सेंटर (SFTC) भी स्थित है।

सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण होने के बावजूद ‘लाभ-हानि’ और ‘कम ट्रैफिक’ का आकलन कर इस परियोजना को ठंडे बस्ते में डालना जिलावासियों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड की सीमा से सटे इस क्षेत्र में रेल लाइन न केवल स्थानीय व्यापार बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी एक बड़ी जरूरत थी।

हिमाचल प्रदेश देश का प्रमुख सेब उत्पादक राज्य है, लेकिन आज भी यहां के बागवानों के पास सेब को देश की बड़ी मंडियों तक पहुँचाने के लिए रेलवे जैसा सस्ता और सुलभ ट्रांसपोर्टेशन उपलब्ध नहीं है। यदि यह रेल लाइन बिछती, तो न केवल औद्योगिक हब को संजीवनी मिलती, बल्कि ऊपरी क्षेत्रों के बागवानों का सेब भी समय पर मंडियों तक पहुँचता।

वर्तमान में सड़कों पर बढ़ता ट्रैफिक और ढुलाई की ऊंची लागत उद्योगों और किसानों दोनों की कमर तोड़ रही है। रेल मंत्रालय के इस नकारात्मक संकेत के बाद क्षेत्र के बागवानों और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में संघर्ष कर रहे उद्योगपतियों में भारी रोष व्याप्त है।

वहीं लोगों ने राज्यसभा सांसद इन्दु गोस्वामी का आभार भी व्यक्त किया कि कम से कम उन्होंने तो यह मुद्दा उठाया। वहीं लोगों में शिमला पार्लियामेंट्री क्षेत्र के सांसद की निष्क्रियता को लेकर भी काफी निराशा है।

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