शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से राहतअब पढ़ाई पर रहेगा फोकस

By Shailesh Saini Published: 2 Jan 2026, 5:37 AM | Updated: 2 Jan 2026, 5:37 AM 1 min read

एक शिक्षक को मिलेंगे सिर्फ एक-दो अतिरिक्त कार्य, फैसले का हुआ स्वागत

हिमाचल नाऊ न्यूज़ | शिमला

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों के बोझ से राहत देने की दिशा में शिक्षा विभाग ने अहम कदम उठाया है। सरकार के निर्देशों के बाद शिक्षा विभाग ने सभी जिला उपनिदेशकों को नए सिरे से गैर-शैक्षणिक कार्यों के आवंटन के आदेश जारी किए हैं।

नई व्यवस्था के तहत अब प्रत्येक शिक्षक को स्कूल स्तर पर अधिकतम एक या दो गैर-शैक्षणिक दायित्व ही सौंपे जाएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षक अपना अधिकांश समय कक्षा शिक्षण और विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार पर केंद्रित कर सकें।

शिक्षा विभाग के अनुसार अब तक शिक्षकों से करीब 31 प्रकार के गैर-शैक्षणिक कार्य कराए जा रहे थे। इनमें छात्रवृत्ति प्रबंधन, मिड-डे मील, एनएसएस, एनसीसी, ईको क्लब, स्काउट एंड गाइड, पुस्तकालय रखरखाव, वर्दी और पुस्तकों का वितरण, रिकॉर्ड संधारण, विभिन्न सर्वेक्षण, जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण कार्यक्रम और स्कूल स्तरीय आयोजनों की जिम्मेदारी शामिल थी।

विभाग का मानना है कि गैर-शैक्षणिक कार्यों का अत्यधिक बोझ शिक्षण व्यवस्था को प्रभावित कर रहा था। नई व्यवस्था लागू होने से शिक्षकों पर प्रशासनिक दबाव कम होगा और छात्रों को प्रत्यक्ष रूप से इसका लाभ मिलेगा।जिला उपनिदेशकों को निर्देश दिए गए हैं कि स्कूलों में कार्यों का पुनर्वितरण संतुलित और व्यावहारिक तरीके से किया जाए, ताकि किसी एक शिक्षक पर अतिरिक्त जिम्मेदारी न पड़े।

शिक्षक संगठनों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे लंबे समय से चली आ रही मांग की पूर्ति बताया है और उम्मीद जताई है कि इससे सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार देखने को मिलेगा।

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