6946 करोड़ की परियोजना से दिल्ली को पानी, हिमाचल को बिजली, पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने किया था बड़ा प्रयास
नाहन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट श्रीरेणुकाजी बांध को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से फॉरेस्ट क्लीयरेंस की अंतिम मंजूरी मिल गई है।
दशकों से लंबित इस राष्ट्रीय महत्व की बहुआयामी परियोजना को मंजूरी मिलने के साथ ही अब इसके निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। परियोजना के प्रथम चरण में बनाई जाने वाली डायवर्सन टनलों के लिए 16 जनवरी को टेंडर खोले जाएंगे।
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6946 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला श्रीरेणुकाजी बांध छह वर्षों में तैयार किया जाएगा। परियोजना के पूरा होने पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को प्रतिदिन 23 लाख क्यूसिक पानी उपलब्ध कराया जाएगा, जबकि हिमाचल प्रदेश को 40 मेगावाट बिजली प्राप्त होगी।
इसके अलावा हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड को सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराया जाएगा।
फॉरेस्ट क्लीयरेंस मिलना इस परियोजना की सबसे बड़ी बाधा माना जा रहा था, जो अब दूर हो गई है। मंजूरी के बाद मुख्य जलधारा को डायवर्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसके पश्चात बांध निर्माण कार्य द्रुत गति से आगे बढ़ेगा।
श्रीरेणुकाजी में बनने वाले इस बांध की ऊंचाई 148 मीटर होगी। बांध निर्माण से 24 किलोमीटर लंबी झील अस्तित्व में आएगी, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्चुअल शिलान्यास के दौरान परशुराम सागर नाम दिया गया था। इस झील के निर्माण से 1988 हेक्टेयर भूमि जलमग्न होगी।
बड़ी बात तो यह भी है कि पूर्व में रही भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के द्वारा श्री रेणुका जी बांध परियोजना का मामला रखा गया था इसके बाद केंद्र सरकार के साथ 4 राज्यों के मुख्यमंत्री की एक बैठक भी संभव हुई थी। यह पूर्व सरकार का ही प्रयास था कि इस बांध परियोजना का वर्चुअल शिलान्यास किया गया था।
परियोजना की लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत राशि छह लाभान्वित राज्यों द्वारा वहन की जाएगी। बांध निर्माण से 37 गांवों के 259 परिवार पूर्ण रूप से विस्थापित होंगे, जबकि कुल 1142 परिवार प्रभावित होंगे।
प्रभावित परिवारों को सरकार द्वारा अब तक 621 करोड़ रुपये से भी अधिक का मुआवजा प्रदान किया जा चुका है।
करीब पांच दशकों तक यह परियोजना बजट, भूमि अधिग्रहण, फॉरेस्ट क्लीयरेंस, न्यायालयीन अड़चनों और राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में अटकी रही। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शिलान्यास और फॉरेस्ट क्लीयरेंस मिलने के बाद इसे बड़ी प्रशासनिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
खबर की पुष्टि करते हुए श्रीरेणुकाजी बांध परियोजना के महाप्रबंधक खेम सिंह ठाकुर ने बताया कि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से परियोजना को फॉरेस्ट क्लीयरेंस की अंतिम मंजूरी मिल चुकी है।
उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में बनाई जाने वाली डायवर्सन टनलों के लिए 16 जनवरी को टेंडर खोले जाएंगे, जिसके बाद बांध निर्माण कार्य तेज गति से शुरू होगा।
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