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धौलाकुआं में ऐसा शिव मंदिर, जहां किसानों की हर कामना होती है पूर्ण

Shailesh Saini | 14 जनवरी 2026 at 9:20 pm

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आस्था, खेती और विज्ञान का संगम बना केवीके धौलाकुआं परिसर

नाहन/ धौला कुआं

कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं परिसर स्थित शिव मंदिर अब किसानों और श्रद्धालुओं के लिए आस्था का मजबूत केंद्र बनता जा रहा है। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर यहां विशेष पूजा-अर्चना, हवन-यज्ञ और भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों, कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मियों और किसानों ने भाग लिया।

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इस दौरान अच्छी फसल, समृद्धि और खुशहाली के लिए विशेष कामना की गई।कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रभारी डॉ. पंकज मित्तल ने बताया कि कृषि में सूर्य का विशेष महत्व है।

सूर्य की किरणों से ही फसलों को ऊर्जा, पोषण और प्राकृतिक सुरक्षा मिलती है। इसी वैज्ञानिक आधार के चलते मकर संक्रांति पर सूर्य आराधना के साथ हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया और किसानों की खुशहाली के लिए पूर्ण आहुति डाली गई।

डॉ. पंकज मित्तल ने बताया कि केवीके परिसर स्थित शिव मंदिर का हाल ही में जीर्णोद्धार करवाया गया है। इसके बाद नियमित रूप से पूजा-अर्चना शुरू की गई।

उन्होंने कहा कि यह मंदिर अब केवल धार्मिक स्थल नहीं रहा, बल्कि किसानों और कर्मचारियों के लिए सकारात्मक ऊर्जा और विश्वास का केंद्र बन चुका है।

इस शिव मंदिर से जुड़ी आस्था का एक सशक्त उदाहरण पालमपुर विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त अनुभाग अधिकारी कामेश्वर वर्मा की कहानी के रूप में सामने आया है।

कामेश्वर वर्मा ने बताया कि उन्होंने इसी मंदिर में अपनी बेटी की सरकारी नौकरी की कामना की थी। भोलेनाथ की कृपा से उनकी यह मनोकामना पूरी हुई और उनकी बेटी को सरकारी नौकरी प्राप्त हुई।

इसी कृतज्ञता भाव के साथ वह मकर संक्रांति पर आयोजित हवन-यज्ञ और भंडारे में विशेष रूप से शामिल होने पहुंचे।स्थानीय किसान दीपक पुंडीर ने भी मंदिर से जुड़ा अपना अनुभव साझा किया।

उन्होंने बताया कि वह अपनी फसलों की पहली उपज शिव मंदिर में समर्पित करते हैं। उनका विश्वास है कि इस परंपरा के कारण उनके यहां कभी अन्न-धन की कमी नहीं रही।

श्रद्धालुओं और किसानों का कहना है कि कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं परिसर स्थित यह शिव मंदिर आज आस्था और खेती के संतुलन का प्रतीक बन चुका है, जहां विज्ञान और विश्वास एक साथ जुड़कर किसानों को आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहे हैं।

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