शिमला में नशे और चिट्टे के खिलाफ कार्रवाई को लेकर हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। चिट्टा गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर 11 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
शिमला
नशे के खिलाफ रणनीति पर उच्च स्तरीय मंथन
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शिमला में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में चिट्टे और नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार की नीति पूरी तरह साफ है और नशे के खिलाफ किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
कानून तोड़ने वालों के लिए कोई रियायत नहीं
बैठक में यह भी दोहराया गया कि जिन पर कानून की रक्षा की जिम्मेदारी है, यदि वही कानून तोड़ते पाए जाते हैं, तो उनके लिए किसी भी तरह की रियायत संभव नहीं है। इसी नीति के तहत चिट्टा तस्करी और नशे से जुड़े मामलों में संलिप्त पाए गए 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है।
संविधान के प्रावधानों के तहत सख्त कदम
सरकार ने इन पुलिसकर्मियों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2)(बी) के तहत सेवा से बर्खास्त किया है। यह प्रावधान असाधारण परिस्थितियों में बिना विभागीय जांच के त्वरित कार्रवाई की अनुमति देता है, जब राज्यहित और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो।
सरकार का समाज को स्पष्ट संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय आसान नहीं था, लेकिन प्रदेश और समाज के व्यापक हित में आवश्यक था। उन्होंने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि चिट्टा तस्करी और नशे के अवैध कारोबार से जुड़े किसी भी व्यक्ति को, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो, बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि नशे के खिलाफ यह लड़ाई केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।
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