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एसडीएम डीसी से की खली के आरोपों के बीच जिला की अन्य राजस्व टीम से डिमार्केशन की सिफारिश

Shailesh Saini | 20 जनवरी 2026 at 3:14 pm

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तहसीलदार दे चुके हैं स्पष्टीकरण, निष्पक्षता स्पष्ट करने पर प्रशासन का जोर

पांवटा साहिब :

जिला सिरमौर के पांवटा साहिब के तहसीलदार ऋषभ शर्मा पर लगाए गए द ग्रेट खली उर्फ दिलीप राणा की जमीन के दस्तावेजों में हेरा फेरी का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।

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मंगलवार को शिमला में खली ने इस मामले में फिर से पत्रकार वार्ता की। इस से पहले 16 जनवरी को जांच अधिकारी एसडीएम पांवटा साहिब ने गुंजीत सिंह चीमा ने डीसी को पत्र लिखकर जिला की किसी अन्य राजस्व टीम से जमीन की डिमार्केशन करवाने का आग्रह कर दिया है।

वही तहसीलदार पांवटा साहिब के खिलाफ दिलीप सिंह राणा उर्फ द ग्रेट खली द्वारा लगातार लगाए जा रहे आरोपों के बीच प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाई है ।

उप-मंडलाधिकारी (ना.) पांवटा साहिब ने उपायुक्त सिरमौर को पत्र लिखकर विवादित भूमि का सीमांकन पांवटा साहिब के बाहर की किसी स्वतंत्र राजस्व टीम से करवाने की सिफारिश की है।

प्रशासनिक स्तर पर यह स्पष्ट किया गया है कि इस प्रकरण में तहसीलदार पांवटा साहिब पहले ही अपना स्पष्टीकरण दे चुके हैं। तहसीलदार की ओर से दी गई रिपोर्ट में उनके द्वारा की गई पूरी कार्यवाही को नियमों के अनुरूप और निष्पक्ष बताया गया है।

इसके बावजूद दिलीप सिंह राणा द्वारा लगातार इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाए जाने से मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। एसडीएम कार्यालय द्वारा उपायुक्त को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि संबंधित भूमि के राजस्व अभिलेखों और तथ्यों की गहन जांच के बाद यह निष्कर्ष सामने आया है कि नवीन और सटीक सीमांकन आवश्यक हो गया है।

वास्तविक भौतिक कब्जे का सही आकलन करने और फर्द कब्जा की शुद्ध तैयारी के लिए डिमार्केशन को जरूरी बताया गया है।
पत्र में यह भी उल्लेख है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीमांकन की कार्यवाही जिला की अन्य किसी राजस्व से करवाई जाए, ताकि निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे और सभी पक्ष संतुष्ट हों।

इसी क्रम में जिला मुख्यालय या किसी अन्य उप-मंडल से राजस्व अधिकारियों अथवा कानूनगो की टीम प्रतिनियुक्त करने का अनुरोध किया गया है।


प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, बाहर की राजस्व टीम से सीमांकन करवाने की सिफारिश का उद्देश्य तहसीलदार की छवि पर लगाए जा रहे आरोपों को लेकर फैले भ्रम को दूर करना और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है। शिकायतकर्ता पक्ष को भी सीमांकन के दौरान उपस्थित रहने और दो अनुभवी राजस्व अधिकारियों के नाम सुझाने का विकल्प दिया गया है।

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