एसएफआई के 56 वर्ष पूरे, शिमला में सेमिनार आयोजित
राकेश सिंघा बोले, छात्र राजनीति सामाजिक बदलाव की मजबूत ताकत
शिमला।
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के 56 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य पर मंगलवार को एसएफआई शिमला जिला कमेटी द्वारा चितकारा पार्क केथू स्थित किसान मजदूर भवन में एक सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का विषय हमारा संघर्ष हमारी विरासत रखा गया।
कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पहले छात्र संघ अध्यक्ष एवं एसएफआई हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्य अध्यक्ष कॉमरेड राकेश सिंघा मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में छात्र राजनीति के इतिहास और वर्तमान प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे।
राकेश सिंघा ने कहा कि वर्ष 1978 में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में पहली बार छात्र संघ के चुनाव हुए थे और 1979 में एसएफआई से वे अध्यक्ष निर्वाचित हुए। उन्होंने कहा कि एसएफआई का इतिहास फीस वृद्धि और छात्र विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्षों से जुड़ा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1970 से अब तक देशभर में समतामूलक शिक्षा और सामाजिक न्याय की लड़ाई में 278 से अधिक छात्र-छात्राओं ने शहादत दी है।
एसएफआई राज्य सचिव सन्नी सेकटा ने कहा कि संगठन ऐसे दौर में अपना स्थापना दिवस मना रहा है जब सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था पर संकट है।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने और शिक्षा के निजीकरण का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि देश में 90 हजार से अधिक सरकारी स्कूल बंद किए जा चुके हैं, जिससे गरीब वर्ग शिक्षा से दूर होता जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक शिक्षा का ढांचा कमजोर हो रहा है और छात्र मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने छात्र समुदाय से शिक्षा के सार्वजनिक ढांचे को बचाने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।
सेमिनार के अंत में एसएफआई शिमला जिला कमेटी ने छात्र विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया।