Loading...

एनडीबी-वित्तपोषित जल परियोजनाओं का जयपुर में अंतिम मूल्यांकन

By Shailesh Saini Published: 24 Jan 2026, 9:15 AM | Updated: 24 Jan 2026, 9:15 AM 1 min read

हिमाचल के आठ जिलों में संचालित परियोजनाओं पर हुआ गहन मंथन

नाहन/शिमला | हिमाचल नाऊ न्यूज़

डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) द्वारा भारत में वित्तपोषित जल परियोजनाओं के मूल्यांकन को लेकर जयपुर में अंतिम प्रसार बैठक एवं कार्यशाला आयोजित की गई।

इस बैठक का आयोजन वाणी इंडिया ने एनडीबी के सहयोग से किया, जिसमें हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में चल रही जल आपूर्ति एवं सीवरेज परियोजनाओं के सामाजिक, पर्यावरणीय, लैंगिक और जलवायु प्रभावों पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में बताया गया कि एनडीबी के सहयोग से हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर, चंबा, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर जिलों में जल परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं।

इन परियोजनाओं के लिए लगभग 100 मिलियन डॉलर का वित्तपोषण किया गया है, जिन्हें वर्ष 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।कार्यशाला के दौरान प्रयास सोसाइटी की ओर से भाग लेते हुए संस्था के सचिव धीरज रमौल ने हिमाचल प्रदेश में तेजी से सूखते पारंपरिक जल स्रोतों, विशेषकर प्राकृतिक चश्मों, पर चिंता जताई।

उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में ये जल स्रोत केवल पेयजल का साधन नहीं, बल्कि स्थानीय जीवन और पर्यावरण का आधार हैं।धीरज रमौल ने कहा कि जल संकट की बढ़ती चुनौती के बीच बोरवेल पर बढ़ती निर्भरता चिंता का विषय है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पारंपरिक जल स्रोतों को समय रहते संरक्षित नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न हो सकता है। उनका कहना था कि “जल है तो कल है”, लेकिन यह तभी संभव है जब प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।

उन्होंने एनडीबी-वित्तपोषित परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन में स्थानीय परिस्थितियों, समुदाय की भागीदारी और पारंपरिक जल संरक्षण ज्ञान को शामिल करने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि पहाड़ी राज्यों में स्थानीय सहभागिता के बिना बनाई गई योजनाएं लंबे समय तक प्रभावी नहीं रह सकतीं।बैठक के अंत में यह निष्कर्ष सामने आया कि जल परियोजनाओं को केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित न रखते हुए पर्यावरण संरक्षण, लैंगिक समानता, जलवायु न्याय और समुदाय की भागीदारी को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

विशेषज्ञों ने माना कि जल संकट से निपटने के लिए समग्र और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना समय की मांग है।

Tags: