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आजीवन कारावासियों की रिहाई पर नई नीति लागू

Shailesh Saini | 14 जनवरी 2026 at 11:13 am

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सख्त अपराधों में 20–25 साल से पहले राहत नहीं, राज्य सजा समीक्षा बोर्ड बना स्थायी

शिमला

हिमाचल प्रदेश सरकार ने आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों की समय से पहले रिहाई को लेकर नई नीति लागू कर दी है। गृह विभाग द्वारा अधिसूचित इस नीति के साथ वर्ष 2001 और 2003 के पुराने आदेशों को निरस्त कर दिया गया है।

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नई व्यवस्था सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई है और इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

नई नीति की सबसे अहम खासियत यह है कि अब आजीवन कारावासियों की रिहाई के मामलों की समीक्षा के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य सजा समीक्षा बोर्ड को स्थायी निकाय के रूप में गठित किया गया है। यह बोर्ड पात्र मामलों में सजा की समीक्षा कर सरकार को समयपूर्व रिहाई की सिफारिश करेगा।

बोर्ड की अध्यक्षता अतिरिक्त मुख्य सचिव या सचिव (गृह) करेंगे। बोर्ड में विधि सचिव सह विधि स्मरणकर्ता, उच्च न्यायालय द्वारा नामित जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मुख्य परिवीक्षा अधिकारी, पुलिस महानिदेशक द्वारा नामित आईजी रैंक से कम नहीं वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, एक महिला सदस्य तथा जेल विभाग के डीजी/एडीजी/आईजी सदस्य सचिव के रूप में शामिल होंगे।बैठक के लिए कम से कम चार सदस्यों की उपस्थिति, अध्यक्ष सहित, अनिवार्य होगी।

14 साल पूरे होने से स्वतः रिहाई नहीं

नीति के अनुसार बीएनएसएस की धारा 475 के अंतर्गत आने वाले पुरुष व महिला आजीवन कारावासी 14 वर्ष की वास्तविक सजा बिना रिमिशन पूरी करने के बाद रिहाई के लिए विचार के पात्र होंगे। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल 14 वर्ष पूरे हो जाने से स्वतः रिहाई नहीं मिलेगी।

बोर्ड हर मामले में अपराध की प्रकृति, परिस्थितियां, जेल में कैदी का आचरण, समाज में पुनर्वास की संभावना और परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसे पहलुओं का मूल्यांकन करेगा। ऐसे मामलों में कुल कारावास अवधि, रिमिशन सहित, सामान्यतः 20 वर्ष से अधिक नहीं होगी।

जघन्य अपराधों में सख्त रुख

नई नीति में गंभीर और जघन्य अपराधों के मामलों में सख्त मापदंड तय किए गए हैं। दुष्कर्म के साथ हत्या, डकैती के साथ हत्या, आतंकी घटनाओं में हत्या, जेल या पैरोल के दौरान हत्या, ड्यूटी के दौरान लोक सेवक की हत्या, गैंगस्टर, कॉन्ट्रैक्ट किलर, तस्करी और नशीले पदार्थों के कारोबार से जुड़े मामलों में सजा काट रहे आजीवन कारावासियों को कम से कम 20 वर्ष की सजा रिमिशन सहित पूरी करनी होगी। ऐसे मामलों में कुल सजा अवधि 25 वर्ष से अधिक नहीं होगी।

अन्य आजीवन कारावासियों के लिए क्या हैं नियम

धारा 475 बीएनएसएस के अंतर्गत न आने वाले पुरुष आजीवन कारावासी 10 वर्ष की वास्तविक सजा और कुल 14 वर्ष रिमिशन सहित पूरी करने के बाद रिहाई के लिए विचार के पात्र होंगे। वहीं महिला आजीवन कारावासी 7 वर्ष की वास्तविक सजा और कुल 10 वर्ष रिमिशन सहित पूरी करने के बाद समयपूर्व रिहाई के लिए पात्र मानी जाएंगी।

सरकार का कहना है कि इस नीति का उद्देश्य न्यायालयों के निर्देशों के अनुरूप मानवीय, संतुलित और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना है, ताकि सुधार की संभावना रखने वाले कैदियों को समाज की मुख्यधारा में लौटने का अवसर मिल सके, जबकि गंभीर अपराधों में सख्ती भी बनी रहे।

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