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सिरमौर वन विभाग इस बार वन संपदा को बचाने में हुआ कामयाब

By Ankita Published: 17 May 2024, 3:38 PM | Updated: 17 May 2024, 3:38 PM 1 min read

1 लाख 39 हजार हेक्टेयर में से इस बार 38 हेक्टेयर चढ़ा आग की भेंट

HNN/ नाहन

फायर सीजन में जिला सिरमौर वन विभाग की नई रणनीति और कर्मचारियों का हाई अलर्ट इस बार वन संपदा को आग से बचाने में कामयाब हुआ है। 1 लाख 39 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र में से केवल 38 हेक्टेयर जंगल आग की भेंट चढ़ा है।

बड़ी बात तो यह है कि डीप फॉरेस्ट की जगह ऐसा फॉरेस्ट एरिया आग की भेंट चढ़ा है जो सड़क अथवा गांव के साथ सटा हुआ था। इसमें बड़ी वजह आते जाते वाहन चालकों के द्वारा बिना भुजाई हुई बीड़ी अथवा सिगरेट और शादी के दौरान हवाई आतिशबाजी कारण बनी है।

जारी समर सीजन में वन वृत्त नाहन के द्वारा जंगल की आग की 20 घटनाएं दर्ज हुई हैं जिसके अंतर्गत 38 हेक्टेयर वन क्षेत्र आया है। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार 95 फायर वॉर्चस सहित तमाम वन अधिकारी हाई अलर्ट पर है।

विभाग के द्वारा सभी कर्मचारियों की छुट्टियां भी रद्द कर दी गई हैं। यहां यह भी बताना जरूरी है कि बीते वर्ष समर और विंटर सीजन में 659 जंगल की आग की घटनाएं हुई थी। जिसमें गर्मियों में 95 तथा सर्दियों में 564 अग्निकांड की घटनाएं हुई थी।

सैटेलाइट से पकड़ा जाएगा आग लगाने वाला
वन विभाग मौजूदा समय पूरी तरह से ही टेक टेक्नोलॉजी से जुड़ चुका है। सैटेलाइट सेंसर सिस्टम के अंतर्गत फॉरेस्ट इंटेलिजेंस रिपोर्ट इंजन यानी एफआईआरई एक ऐसा खोजी सिस्टम है जो आग से पहले धुंआ दिखते ही संबंधित बीट के वन अधिकारी को सूचित कर देगा।

आग सुलगने अथवा फैलने से पहले वन विभाग की टीम मौके पर आसानी से पहुंच पाएगी। यही नहीं सैटेलाइट सर्च सिस्टम में आग लगने वाला अपराधी भी वन विभाग के रडार पर होगा। इस पूरी व्यवस्था को वन विभाग के अधिकारियों के साथ एप के माध्यम से जोड़ा गया है।

यही वजह है कि इस बार जहां भी जंगल सुलगना शुरू हुआ वहां मौके पर बचाव दल पहुंच गया था। यहां यह भी बताना जरूरी है कि जंगल की आग अति विनाशकारी होती है जिससे ग्लोबल वार्मिंग, जैव विविधता के साथ साथ प्राकृतिक आवासों को भी भारी नुकसान होता है।

वन विभाग की क्या है इस बार तैयारी
जिला सिरमौर वन विभाग के द्वारा फायर सीजन को देखते हुए 37 क्रॉस फायर क्षेत्र तैयार किए गए हैं। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला में 216 वन बीट है जिसमें 140 सेंसिटिव बीट मानी गई है। विभाग के द्वारा सेंसिटिव क्षेत्र में 24 घंटे सातों दिन नजर बनाई जा रही है।

इसके अलावा आधुनिक उपकरण ऑन के साथ-साथ प्रतिदिन वन क्षेत्र के साथ लगते गांव में मीटिंग और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। खबर की पुष्टि नाहन वृत्त फॉरेस्ट कंजर्वेटर वसंत किरण बाबू के द्वारा की गई है।

उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वनों को आग से बचने के लिए वह अपना महत्वपूर्ण योगदान दें। उन्होंने सड़क अथवा गांव के आसपास क्षेत्र में धूम्रपान करने वालों से भी अपील करते हुए कहा कि वह बीड़ी अथवा सिगरेट को पूरी तरह बुझाकर ही फेकें। उन्होंने कहा की शादी अथवा उत्सव में हवाई आतिशबाजी से परहेज करें।

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