सिरमौर / गोसदनो के निर्माण पर व्यय की गई 62 लाख की राशि-सुखराम चौधरी

ByPRIYANKA THAKUR

Oct 1, 2021

HNN / नाहन

जिला सिरमौर में अगस्त 2020 से अब तक 10 गोसदनों का निर्माण किया जा चुका है, जबकि 2 अन्य गौसदनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इन गौसदनो के निर्माण में सरकार द्वारा 61 लाख 13 हजार 64 की राशि व्यय की गई है यह जानकारी ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने दी।

उन्होंने बताया कि सिरमौर जिला में सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले गौ सदनों में दुलेश्वर गौ सेवा संस्थान एवं आध्यातम उन्नति केंद्र बरहाल, श्री महादेव गौ सेवा संस्थान एवं वेलफेयर सोसाइटी माजरा, गोकुलधाम गौशाला टोकियो, माता बाला सुंदरी गौशाला नाहन, काऊ सेंचुरी कोटला बड़ोग राजगढ, लुटरु महादेव गौशाला कालाघाट, गौ सदन एम एल आई एस कोटला बडोग, मां रेणुका राधा कृष्ण मंदिर दादाहु, डॉ वाईएस परमार आरान्या गौ सदन कलोहा शकेन तहसील राजगढ़, हरि ओम गौशाला राजगढ़ प्रमुख है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा निराश्रित पशुओं को सहारा देने के लिए गोसदनों को प्रदान की जाने वाली वितीय सहायता योजना का शुभारंभ मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने 3 सितंबर 2020 को  किया था।  इस योजना के तहत प्रत्येक माह हर गौसदन को 500 रूपये प्रति पशु प्रदान किया जा रहा है। उन्होनें बताया कि स्थानीय स्तर गौसदन हेतु आवेदन करने के लिए गौ सदन का मालिक, पशु चिकित्सा अधिकारी व तहसीलदार/नायब तहसीलदार की कमेटी के समक्ष आवेदन कर सकते हैं।

इसके अतिरिक्त उपमंडल स्तर पर मंडल अधिकारी व वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी कमेटी के सदस्य होगें। जबकि गौसदन को वितीय सहायता की राशि प्रदान करने के लिए  जिला स्तरीय कमेटी जिसमें जिलाधीश, अध्यक्ष गौ सेवा आयोग के सदस्य, उपनिदेशक पशुपालन विभाग जो कि कमेटी के सदस्य होंगे के समक्ष गौसदन को वित्तीय सहायता के लिए आवेदन किया जा सकता है। यह कमेटी अपने स्तर पर जांच पड़ताल करने के बाद अनुमति देगी।

उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा प्रदान की जा रही वित्तीय सहायता राशि प्राप्त करने के लिए कमेटी को गौ सेवा आयोग द्वारा निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन करना होगा। जिसमें आवेदनकर्ता के पास 6 माह से अधिक का गोवंश होना चाहिए और 30 या 30 से अधिक पशु गोवंश में होने चाहिए। इसके अतिरिक्त गौ सेवा आयोग द्वारा निर्धारित पंजिका पर रिकॉर्ड होना चाहिए। प्रत्येक माह गौसदन  में रखे गए पशुओं का सत्यापन स्थानीय कमेटी द्वारा किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त सभी पशुओं की टैगिंग व रजिस्ट्रेशन भी अनिवार्य होगी।

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