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HNN/ नाहन

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के नाहन सेवा केंद्र में रविवार को रक्षाबंधन के पावन पर्व को बड़े उमंग उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर संस्था की संचालिका ब्रह्माकुमारी रमा ने रक्षाबंधन का आध्यात्मिक रहस्य बताते हुए कहा कि रक्षा का यह बंधन एक तरह का दृढ़ संकल्प का सूत्र है जो हमारी बुराइयों से रक्षा करता है। इस समय रक्षा की जरूरत हरेक नर और नारी को है और स्वयं निराकार परमात्मा पिता हम आत्माओं की रक्षा के लिए पवित्रता का यह पावन बंधन सर्व आत्माओं को बांधते हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार इंद्राणी ने इंद्र को रक्षा सूत्र बांधा और उससे इंद्र ने असुरों पर विजय प्राप्त की। इंद्राणी और इंद्र का भाई बहन का नाता तो नहीं था और इंद्राणी को रक्षा की भी आवश्यकता नहीं थी, परंतु यह पवित्रता की प्रतिज्ञा थी। इसको प्राचीन काल में विषतोड़क पर्व भी कहते थे। अतः यदि वह त्योहार भाई द्वारा बहन की रक्षा के संकल्प का ही प्रतीक होता तो आज तक ब्राह्मणों द्वारा राखी बांधने का रिवाज नहीं चला आता।

उन्होंने कहा कि यदि रक्षा की दृष्टि से गहराई से चिंतन किया जाए तो देखा जाता है कि कन्याएं छोटे-छोटे अबोध भाइयों को राखी बांधती हैं। उस स्थिति में यह परंपरा कहां लागू होती है ? परंतु यह परमात्मा द्वारा हम आत्माओं की रक्षा का पर्व है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में सभी बंधनों से छुटना चाहते हैं परंतु यह स्नेह का बंधन है जिसमें हर एक आत्मा परमात्मा के स्नेह के बंधन में बंधती है।

उन्होंने बताया, रक्षाबन्धन में माथे पर तिलक लगाने का अर्थ है आत्म स्मृति का टीका लगाना व राखी बांधना अर्थात पवित्रता का बंधन बांधना। मुख मीठा कराने का अर्थ है मीठे बोल बोलना। इस मौके पर शिवानी, बीके प्रियंका, बीके दीपा ने रक्षाबंधन के पावन पर्व पर बधाइयां दी और बताया कि इस पावन पर्व को 7 अगस्त से 11 अगस्त तक मनाया जाएगा।

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