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HNN/ सोलन

टमाटर एक ऐसी फसल है, जिसकी खेती आमतौर पर हर मौसम में की जाती है। टमाटर की अच्छी उपज के लिए टमाटर के पौधों को रोपते हैं, उनकी देखभाल करते हैं, छंटाई करते हैं, खाद आदि डालते हैं। मगर इतनी देखभाल और ध्यान के बावजूद भी कभी-कभी टमाटर के पौधे में रोगों का हमला हो जाता है, जिससे फसलों को नुक्सान पहुँचता है।

ऐसा ही कुछ देखने को मिला है जिला सोलन में जहां टमाटर की फसल सड़न रोग की चपेट में आ गई है। यह रोग जिला के अधिकतर क्षेत्रों में टमाटर की फसल पर देखने को मिल रहा है जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों का मानना है कि एक तो पहले ही उन्हें टमाटर के अच्छे दाम नहीं मिल पा रहे हैं, ऊपर से रोग की चपेट में आने से टमाटर की फसल प्रभावित हो रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, टमाटर में लगने वाले काले दाग का मुख्य कारण अधिक बारिश या खेत में पानी का खड़ा रहना होता है। भारी बारिश से जिले के अधिकतर क्षेत्रों में टमाटर की फसल पर काले दाग का रोग लग रहा है। जिले में सालाना करीब 40 से 50 करोड़ों रुपये का कारोबार होता है। मगर इस बार सड़न रोग छोटे-बड़े सभी टमाटर को अपना ग्रास बना रहा है। एक सड़ा हुआ टमाटर दूसरे टमाटरों में संक्रमण कर रहा है।

किसान रिडोमिल एमएजैड का करें छिड़काव
जिला कृषि अधिकारी सीमा कंसल ने बताया कि रोग की रोकथाम के लिए किसानों को टमाटर के खेत में पानी की निकासी की उचित व्यवस्था रखनी चाहिए। टमाटर की जड़ से लेकर करीब 15 से 20 सेमी की उंचाई तक के पत्तों को काट देना चाहिए। किसान रिडोमिल एमजैड फफूंदनाशी, और इंडोफिल एम 45 प्लस सैंडोविट 40 ग्राम 15 मिली पानी के साथ समय-समय पर साफ मौसम में 7-10 दिन बाद छिड़काव करें।

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