प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र पर व्यय होंगे इतने करोड़ – सरवीन चौधरी

कहा….शैक्षिक संवाद से स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के नए अवसर होते हैं प्राप्त

HNN / धर्मशाला

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री सरवीन चौधरी ने कहा कि राष्ट्र के उत्थान में शिक्षा की उपयोगिता को देखते हुए सरकार ने सवा चार वर्षो के भीतर शिक्षा के आधार को सुदृढ़ करने पर जोर दिया है। इस दिशा में नई योजनाएं भी आरंभ की गई हैं। वित्त वर्ष 2022-23 में शिक्षा के लिए 8412 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है। यह बात सरवीन चौधरी राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला शाहपुर में सर्व शिक्षा अभियान के तहत शिक्षा संवाद कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि शिरकत करने के उपरांत उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए बोल रही थीं।

शिक्षा संवाद कार्यक्रम में खण्ड रैत के 152 स्कूलों के स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, सदस्य, पंचायत जन प्रतिनिधि और खण्ड के समस्त प्रधानाचार्य, मुख्य अध्यापक तथा अध्यापकों ने भाग लिया। सरवीन चौधरी ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षण प्रक्रिया की सराहना करते हुए कहा कि आज के बदलते परिवेश में शिक्षण प्रक्रिया को गुणवत्तापूर्ण बनाकर ही हम नौनिहालों का भविष्य संवारने के साथ-साथ एक आदर्श और सभ्य समाज की परिकल्पना कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में बच्चों की पढ़ाई काफी प्रभावित हो गई थी लेकिन इस दौरान भी अध्यापकों ने बच्चों के साथ बराबर संवाद बनाकर शिक्षा के स्तर को और बेहतर करने का प्रयास किया।

उन्होंने कहा कि अध्यापकों का कक्षा के प्रत्येक बच्चे से संपर्क होता है और उन्हें यह कोशिश करनी चाहिए कि हर बच्चे की अभिरुचि को पहचान कर उसकी शिक्षा को नई दिशा देने पर काम किया जाए। उन्होंने कहा कि शैक्षिक संवाद से स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के नए अवसर प्रदान होते हैं, नवाचार के आयाम खुलते हैं और नए अनुभवों से स्कूली बच्चों के बीच शिक्षा के स्तर को बेहतर करने का मौका मिलता है। सरवीन चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बताए गये प्रकल्पों पर विद्यालय गम्भीरता से कार्य करें।

उन्होंने कहा कि विद्यालय शिक्षकों और विद्यार्थियों के समूह बना कर स्वच्छता, प्लास्टिक मुक्त भारत और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर कार्य करें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के कुशल नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है और प्रदेश अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श के रूप में उभरा है। उन्होंने अभिभावकों से आह्वान किया कि अपने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बच्चों से निरंतर संवाद करें और उनके पाठ्यक्रम पर उनसे चर्चा के साथ-साथ एक अच्छा व्यक्ति बनाने पर भी ध्यान दें।


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