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HNN/ नाहन

नाहन ट्रेजरी ऑफिस में हुए बड़े वित्तीय घोटाले को लेकर कुछ बड़े सवाल भी खड़े हो रहे हैं। ई पेंशन सॉफ्टवेयर तक जो फर्जी वित्तीय मामले पेंशनर के बनाए जाते थे उसमें प्रमुख भूमिका डीलिंग हैंड की मानी जाती है। डीलिंग हेड किसके आदेशों पर फर्जी वित्तीय मामले करते थे यह भी जांच का विषय है। सवाल तो यह भी उठता है कि अकेला ट्रेजरी ऑफिसर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दे ही नहीं सकता है। नियमानुसार पेंशनर के वित्तीय मामले की फाइल डीलिंग हैंड ही तैयार करता है।

मामला बनाए जाने के बाद डीटीओ इस पर तमाम डॉक्यूमेंट जांचने के बाद अपने साइन करता है। हालांकि यह पूरा फ्रॉड का मामला डीलिंग हैंड पर भी जा सकता था मगर डीटीओ के द्वारा पत्नी तथा परिवार के अन्य सदस्यों के खातों में पैसे भी डाले गए थे। हालांकि सिरमौर पुलिस के द्वारा संदेह के दायरे में आए कथित आरोपियों के खातों को जांच की दृष्टि से सील कर दिया गया है। यहां यह भी बताना जरूरी है कि सिरमौर के पुलिस प्रमुख विजिलेंस के बड़े घाघ ऑफिसर रहे हैं जिनकी जांच भले ही स्लो हो सकती है मगर परफेक्ट पिक्चर ही निकल कर सामने आएगी।

बरहाल, अब देखना यह होगा जिन पेंशनर्स के नाम पर फर्जी वित्तीय मामले बनाकर सरकारी खजाना लूटा गया है वह कितने व्यक्ति हैं। हालांकि, फिलहाल जो फ्रॉड की अनुमानित राशि है वह 1.69 करोड रुपए की बताई जा रही है। ऐसे में एसआईटी की जांच में यदि पेंशनर्स की संख्या बढ़ जाती है तो यह राशि और अधिक जा सकती है। देखना तो यह भी होगा कि जांच के दायरे में आने वाले अन्य व्यक्तियों के खातों में कितना पैसा किस माध्यम से गया है।

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