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आरक्षण का अर्थ: ‘पीछे छूटों को बराबरी देना, न कि नए लोगों का रास्ता बंद करना’

By Shailesh Saini Published: 8 Dec 2025, 8:21 AM | Updated: 8 Dec 2025, 8:22 AM 1 min read

पूर्व सीजेआई बीआर गवई बोले, SC आरक्षण में क्रीमी लेयर पर अपने समुदाय की आलोचना झेली

हिमाचल नाऊ न्यूज, मुंबई

​पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई ने आरक्षण के उद्देश्य और इसके सतत उपयोग पर एक बड़ा बयान दिया है। मुंबई यूनिवर्सिटी में आयोजित एक लेक्चर के दौरान, उन्होंने कहा कि आरक्षण का मुख्य उद्देश्य पिछड़े लोगों को बराबरी पर लाना है, न कि उन्हें लगातार लाभ देते रहना, जिससे नए जरूरतमंदों का रास्ता बंद हो जाए।

​डॉ. भीमराव अंबेडकर को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देते हुए, पूर्व सीजेआई गवई ने कहा कि अंबेडकर की नजर में आरक्षण ऐसा था जैसे किसी पीछे छूटे व्यक्ति को साइकिल देना, ताकि वह बाकी लोगों के बराबर पहुंच सके। इसका मतलब यह नहीं कि वह व्यक्ति हमेशा साइकिल पर चलता रहे और नए लोगों के लिए रास्ता ही बंद हो जाए।

क्रीमी लेयर पर आलोचना और तथ्य

​पूर्व सीजेआई गवई ने खुलासा किया कि जब उन्होंने अनुसूचित जाति (SC) के आरक्षण में क्रीमी लेयर सिद्धांत लागू करने की बात कही, तो उन्हें अपने ही समुदाय के लोगों की कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा। उन्होंने तर्क दिया कि क्या चीफ जस्टिस या चीफ सेक्रेटरी के बेटे और ग्राम पंचायत स्कूल में पढ़ने वाले मजदूर के बेटे को एक ही पैमाने से मापा जा सकता है।

​गवई ने बताया कि इंदिरा साहनी केस में क्रीमी लेयर सिद्धांत तय हुआ था, और एक फैसले में उन्होंने खुद कहा था कि यह सिद्धांत SC वर्ग पर भी लागू होना चाहिए। आलोचना करने वाले कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि वह खुद आरक्षण का लाभ लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और अब क्रीमी लेयर की बात कर रहे हैं। इस पर जवाब देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जज की नियुक्ति में आरक्षण नहीं होता, इसलिए ये आरोप पूरी तरह तथ्यहीन हैं।

​पूर्व सीजेआई गवई ने ज़ोर देकर कहा कि आरक्षण का मूल लक्ष्य सामाजिक और आर्थिक रूप से सबसे पिछड़े लोगों तक पहुंचना होना चाहिए।

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